शिमला, आठ मई (भाषा) हिमाचल प्रदेश के शिमला में पंचायत के आधिकारिक रिकॉर्ड में 44 से 54 वर्ष की आयु के 40 से अधिक लोगों को फर्जी तरीके से ‘बुजुर्ग’ के रूप में दर्ज कराया गया ताकि वे वृद्धावस्था पेंशन प्राप्त कर सकें। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है, जब प्रदेश में 3,754 ग्राम पंचायतों के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया जारी है।
लगभग 45 लोगों द्वारा किया गया यह कथित घोटाला मुख्य रूप से 2021 से 2025 के बीच शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के चिरगांव की तग्नू-जंगलीख पंचायत में पंचायत परिवार रजिस्टर में हेराफेरी कर किया गया था।
हिमाचल प्रदेश सरकार 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के उन निवासियों को 1,000 रुपये से 1,700 रुपये प्रति माह की वृद्धावस्था पेंशन प्रदान करती है, जिनकी वार्षिक आय 35,000 रुपये से अधिक नहीं है।
अधिकारियों ने संदेह जताया है कि सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत के इस गोरखधंधे को अंजाम दिया गया क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर अभिलेखों में हेरफेर संभव नहीं था। इसी के साथ तत्कालीन पंचायत सचिव और कई अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज बनाने और जाली अभिलेखों के उपयोग के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
जांच के दायरे में आए 45 लोगों में से लगभग 20 लोग तग्नू गांव से और लगभग 25 लोग जांगलिख क्षेत्र से हैं।
लाभार्थियों की सूची में पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि इस अनियमितता को लेकर पंचायत में लंबे समय से अफवाहें फैल रही थीं, लेकिन अभिलेखों की जांच के बाद अब यह मामला सामने आया। यह भी आरोप है कि कुछ लोग 2018-19 से ही पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।
पुलिस के मुताबिक अधिकारी पंचायत द्वारा जारी परिवार रजिस्टर की प्रतियां, जन्म प्रमाण पत्र, पेंशन आवेदन और सत्यापन प्रक्रिया से संबंधित अन्य दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं, ताकि पूरे गोरखधंधे की तह तक जाया सके।
भाषा जितेंद्र धीरज
धीरज