ब्यूनस आयर्स, नौ मई (एपी) अर्जेंटीना के टिएरा डेल फुएगो प्रांत के अधिकारी उस दावे का विरोध कर रहे हैं कि घातक हंटावायरस प्रकोप की शुरुआत उनके क्षेत्र से हुई।
उनका कहना है कि जांच अर्जेंटीना के उन अन्य प्रांतों में होनी चाहिए, जहां संक्रमित यात्री अटलांटिक क्रूज जहाज पर सवार होने से पहले गए थे।
प्रांतीय अधिकारियों ने कहा कि वायरस की उत्पत्ति टिएरा डेल फुएगो की राजधानी उशुआया के कचरे के ढेर से नहीं हुई, जैसा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने दावा किया है। उनका मानना है कि यह आरोप इस पर्यटन स्थल की छवि खराब कर रहा है।
प्रांत के महामारी विज्ञान निदेशक जुआन फैकुंडो पेट्रिना ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यह ‘‘बदनाम करने का अभियान’’ लगता है।
उन्होंने कहा कि टिएरा डेल फुएगो में आज तक हंटावायरस का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ, जबकि अर्जेंटीना के उत्तरी प्रांतों में ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। यहां तक कि जहाज पर फैले प्रकोप से जुड़े वायरस के एंडीज स्वरूप का भी इस क्षेत्र में कभी कोई मामला नहीं मिला।
उन्होंने बताया कि पुर्तगाल के जिस दंपति की इस वायरस से मौत हो गयी है, उन्होंने अर्जेंटीना और चिली की चार महीने लंबी यात्रा के दौरान टिएरा डेल फुएगो में केवल दो दिन बिताए थे तथा इससे इस बात की संभावना काफी कम हो जाती है कि संक्रमण उन्हें यहीं हुआ हो।
उशुआया अंटार्कटिका का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है और यहां हर साल बड़ी संख्या में क्रूज पर्यटक आते हैं। अधिकारियों को डर है कि वायरस से जुड़ी खबरों से पर्यटन उद्योग को बड़ा नुकसान हो सकता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बुधवार को घोषणा की थी कि मैलब्रान इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ उशुआया के ढलाव घरों में चूहों को पकड़कर जांच करेंगे कि उनमें एंडीज स्वरूप मौजूद है या नहीं। हालांकि दो दिन बाद भी जांच दल वहां नहीं पहुंचा।
विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि राष्ट्रपति जेवियर मिली की स्वास्थ्य बजट कटौती और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से दूरी बनाने की नीति के कारण अर्जेंटीना की स्वास्थ्य व्यवस्था कमजोर हुई है।
कई स्वतंत्र महामारी विशेषज्ञों का मानना है कि वायरस संभवतः मध्य पैटागोनिया के जंगलों से फैला, जहां पहले भी हंटावायरस के मामले मिल चुके हैं और लंबी पूंछ वाले संक्रमित चूहे बड़ी संख्या में पाए जाते हैं।
एपी गोला सिम्मी
सिम्मी