आषाढ़ी एकादशी पर फडणवीस ने पंढरपुर के विट्ठल मंदिर में पूजा-अर्चना की

आषाढ़ी एकादशी पर फडणवीस ने पंढरपुर के विट्ठल मंदिर में पूजा-अर्चना की

आषाढ़ी एकादशी पर फडणवीस ने पंढरपुर के विट्ठल मंदिर में पूजा-अर्चना की
Modified Date: July 25, 2026 / 09:06 am IST
Published Date: July 25, 2026 9:06 am IST

पंढरपुर (महाराष्ट्र), 25 जुलाई (भाषा) महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को आषाढ़ी एकादशी के अवसर पर अपनी पत्नी के साथ पंढरपुर स्थित विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में पारंपरिक महापूजा की और इसी के साथ भगवान विट्ठल के श्रद्धालुओं की ‘वारी’ तीर्थयात्रा का समापन हुआ।

फडणवीस ने कहा कि उन्होंने प्रार्थना की कि देश के युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों को और मजबूती मिले।

उन्होंने महाराष्ट्र में शांति, समृद्धि और खुशहाली, किसानों के कल्याण तथा राज्य पर भगवान विट्ठल का आशीर्वाद बने रहने की भी प्रार्थना की।

फडणवीस ने अपनी पत्नी अमृता फडणवीस के साथ शनिवार तड़के महापूजा की।

उन्होंने प्रार्थना की कि देश के युवाओं के विकास और उनके लिए नए अवसर पैदा करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मोदी द्वारा की जा रही पहलों को और बल मिले तथा प्रत्येक युवा की आकांक्षाएं पूरी हों ताकि ‘विकसित भारत’ के सपने को साकार करने में मदद मिल सके।

बाद में फडणवीस ने वारकरी दंपति बालासाहेब माने और प्रभावती माने को सम्मानित किया तथा ‘श्री विट्ठल निर्मल दिंडी पुरस्कार 2026’ प्रदान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष की वारी यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया है और श्रद्धालुओं की कतार 25 किलोमीटर से अधिक लंबी थी। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने तीर्थयात्रियों के लिए सुचारु व्यवस्था सुनिश्चित की।

फडणवीस ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘दुनिया में ऐसा कोई दूसरा उत्सव नहीं है जिसमें लाखों श्रद्धालु बिना किसी निमंत्रण के पैदल चलकर भगवान विट्ठल का आशीर्वाद लेने आते हैं।’’

उन्होंने दोहराया कि हर साल मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बुनियादी ढांचे में सुधार तथा दर्शन की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक, व्यवस्थित और सुचारु बनाने के लिए प्रस्तावित पंढरपुर मंदिर गलियारे का काम इसी वर्ष शुरू होगा।

फडणवीस ने यह भी कहा कि किसानों का ऋण माफ करने और उन्हें मुफ्त बिजली देने के संबंध में राज्य सरकार के हालिया फैसले वारकरियों की सेवा की भावना से लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वारकरियों की सेवा भगवान विट्ठल की सेवा के समान है।

भाषा

सिम्मी गोला

गोला


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