कोच्चि, 11 अप्रैल (भाषा) केरल उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से कहा है कि वह कासरगोड तालुका में आधिकारिक पत्राचार के लिए कन्नड़ भाषा के उपयोग की अनुमति देने वाले 1982 के परिपत्र को लागू करने की मांग से संबंधित एक प्रतिवेदन पर विचार करके दो महीने में उस पर निर्णय ले।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार वी. एम. की खंडपीठ ने यह निर्देश कासरगोड के एक वकील की जनहित याचिका पर दिया।
वकील ने दावा किया था कि कासरगोड और मंजेश्वरम तालुका के सरकारी विभाग और कार्यालय कन्नड़ में दिए गए आवेदन स्वीकार या संसाधित नहीं कर रहे हैं।
पांच मार्च 1982 को कन्नूर के जिला कलेक्टर द्वारा जारी परिपत्र में तत्कालीन कासरगोड तालुका को कन्नड़ भाषी क्षेत्र घोषित किया गया था और आधिकारिक पत्राचार में इस भाषा के उपयोग की अनुमति दी गई थी।
याचिकाकर्ता ने कहा कि उसने इस साल जनवरी में भी सरकार को एक आवेदन दिया था, जिसमें संबंधित विभागों को इस परिपत्र को लागू करने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
सरकार ने अदालत को बताया कि यदि अदालत निर्देश दे तो उचित प्राधिकरण इस प्रतिवेदन पर विचार करेगा।
इसके बाद अदालत ने याचिका का निपटारा करते हुए आदेश दिया कि सरकार कानून के अनुसार, याचिकाकर्ता को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद, अदालत से आदेश की प्रति मिलने के आठ सप्ताह के भीतर इस पर निर्णय ले।
भाषा जोहेब पवनेश
पवनेश