(मानसी जगानी)
नयी दिल्ली, 25 मई (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के प्रतिष्ठित दिल्ली जिमखाना क्लब को पांच जून तक परिसर खाली करने का निर्देश केंद्र सरकार द्वारा दिए जाने के कुछ दिनों बाद, दिल्ली जिमखाना क्लब प्रबंधन ने सोमवार को संबंधित कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि उनकी नौकरी सुरक्षित है और क्लब तुरंत बंद नहीं होगा।
यह आश्वासन लगभग 600 कर्मचारियों के बीच बढ़ती चिंता के बीच दिया गया है, जिनमें से कई कर्मचारियों ने कहा कि पिछले सप्ताह सरकार का आदेश जारी होने के बाद से उन्हें क्लब के भविष्य, वेतन या संभावित स्थानांतरण योजनाओं के बारे में कोई औपचारिक जानकारी नहीं मिली है।
सोमवार सुबह, कर्मचारियों का एक समूह क्लब के निकास द्वार के सामने स्थित ‘पीर बाबा’ की दरगाह में इकट्ठा हुआ और उन्होंने सौ साल पुरानी संस्था में आजीविका और नौकरी की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच अनुकूल परिणाम के लिए इबादत की।
दरगाह में इबादत के तुरंत बाद, कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें ‘जनरल कमेटी’ के सदस्यों ने बताया कि कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी और प्रशासनिक प्रयास किए जा रहे हैं।
जिमखाना कर्मचारी कल्याण संघ के अध्यक्ष नंदन सिंह नेगी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमें दिन में क्लब के अध्यक्ष मलय सिन्हा और निदेशक कुलदीप चहल का फोन आया। उन्होंने हमें आश्वासन दिया कि हमारी चिंताओं को एक विशेष लिखित पत्र के माध्यम से सरकार तक पहुंचा दिया गया है और इस संबंध में बातचीत हो रही है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि किसी भी कर्मचारी को कोई प्रतिकूल परिणाम न भुगतना पड़े।’
नेगी ने कहा कि क्लब प्रबंधन ने कर्मचारियों को यह भी आश्वासन दिया है कि क्लब पांच जून को बंद नहीं होगा और उनकी नौकरियां सुरक्षित हैं।
क्लब के एक कर्मचारी ने कहा, ‘‘हमें क्लब बंद होने की कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई थी। उस दिन अचानक सभी सदस्यों के फोन बजने लगे। रात तक, आदेश पर चर्चा करने के लिए और भी सदस्य क्लब में आने लगे। हमें इसके बारे में फोन, खबरों और दूसरों से बातचीत के माध्यम से ही पता चला। उस दिन से हममें से कई लोग ठीक से सो नहीं पाए हैं। हमें अपने परिवार पालने हैं और घर-परिवार संभालना है।’’
आश्वासनों के बावजूद, कई कर्मचारियों ने बताया कि अभी तक नौकरी की सुरक्षा की गारंटी देने वाला कोई लिखित संदेश जारी नहीं किया गया है। मुआवज़े और पुनर्वास के संबंध में जल्द स्पष्टता न मिलने पर वे कानूनी कार्रवाई करने पर भी विचार कर रहे हैं।
एक कर्मचारी ने कहा, ‘‘हम कल तक इंतजार करेंगे और फिर हम अदालत का रुख भी कर सकते हैं। हमारी पहली मांग नौकरी की सुरक्षा है। अगर कुछ होता है तो कर्मचारियों को कम से कम मुआवजा तो मिलना चाहिए।’’
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब दिल्ली जिमखाना क्लब ने परिसर खाली करने के केंद्र के निर्देश को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन के समक्ष इस मामले का उल्लेख किया और तत्काल सुनवाई की मांग की। न्यायालय ने 26 मई को मामले की सुनवाई करने पर सहमति जताई।
भाषा शोभना सुरेश
सुरेश