नयी दिल्ली, नौ नवंबर (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने बृहस्पतिवार को कहा कि किसी राष्ट्र का मूल्य उसकी महिलाओं की स्थिति से निर्धारित होता है और महिलाओं को महत्व देना मुख्य रूप से पुरुषों का मामला है।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए ‘‘दूरंदेशी’’ नीतियों और निर्णयों की आवश्यकता है कि सामाजिक कल्याण उपायों का लाभ वास्तव में नागरिकों तक पहुंचे।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि भारत में उत्कृष्ट कानून हैं जिन्हें अच्छे विश्वास के साथ लागू किया गया है, लेकिन इस विशाल और विविधतापूर्ण देश में वास्तविक चुनौती लोकतंत्र और संविधान की परिवर्तनकारी क्षमता का उपयोग करके जमीनी स्तर पर लोगों के अधिकार सुनिश्चित करना है।
यह रेखांकित करते हुए कि एक परिवार का मूल्य महिलाओं की स्थिति से निर्धारित होता है, उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, भविष्य के मद्देनजर, एक राष्ट्र के रूप में हमारा मूल्य काफी हद तक उस महत्व पर निर्भर करेगा जो हम महिलाओं को देते हैं।’’
प्रधान न्यायाधीश ने यहां राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) और राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा, ‘‘महिलाओं को महत्व देना मुख्य रूप से पुरुषों का भी मुद्दा है। इसलिए, मुझे लगता है कि इस क्रम को आगे बढ़ाने से पहले हमें अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है।’’
भाषा शफीक सुरेश
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