श्रीनगर, एक जून (भाषा) जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि मादक पदार्थों के तस्करों और ‘नार्को-आतंकवाद’ के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई के लिए 11 अप्रैल को शुरू किए गए ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान’ के तहत अब तक 1,000 से अधिक तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने कहा कि इसके अलावा 55 से अधिक तस्करों को ‘‘पीआईटी-एनडीपीएस’’ कानून के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया है।
दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में ‘ड्रग-फ्री जम्मू-कश्मीर पदयात्रा’ का नेतृत्व करते हुए सिन्हा ने कहा कि पिछले 51 दिनों में मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़ी 923 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं।
उपराज्यपाल ने कहा कि नशा विरोधी अभियान के तहत 668 ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किए गए हैं तथा 124 पासपोर्ट निरस्त करने की सिफारिश की गई है।
सिन्हा ने कहा कि यह एक जन-आंदोलन है, जिसका साझा उद्देश्य गांवों और शहरों को नशामुक्त बनाना है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे सामने अभी लंबा रास्ता है। नशे के खिलाफ लड़ाई में निरंतर प्रयास, लगातार सतर्कता और एकजुटता की आवश्यकता होगी। हमें अपने संकल्प पर अडिग रहना होगा।’’
उपराज्यपाल ने इस अभियान को आतंकवाद की वित्तीय रीढ़ पर प्रहार करार देते हुए कहा कि मादक पदार्थों के कारोबार को रोककर आतंकवादी नेटवर्क को जीवित रखने वाली जीवनरेखा को काट दिया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह केवल जन-स्वास्थ्य से जुड़ा संघर्ष नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की भी लड़ाई है।’’
सिन्हा ने कहा, ‘‘वर्ष 2021 में मैंने भयमुक्त और नशामुक्त जम्मू-कश्मीर का संकल्प लिया था, ताकि हमारे युवाओं पर मंडराने वाले नशे और आतंक के साये को पूरी तरह समाप्त किया जा सके। आज मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि नशे के जाल में हमारे युवाओं को जकड़ने वाली बेड़ियां अब दिन-प्रतिदिन, कड़ी-दर-कड़ी टूट रही हैं।’’
उपराज्यपाल ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल छापेमारी और गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशासन आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने, जन-जागरूकता बढ़ाने और नशे की लत से पीड़ित लोगों के सम्मानजनक पुनर्वास की दिशा में भी कार्य कर रहा है।
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