Pahalgam Attack NIA Charge Sheet: सालभर बाद खुल रही ‘पहलगाम हमले’ की साजिश की एक-एक परतें.. बच सकती थी अटैक में मारे गए सभी 26 लोगों की जान, लेकिन..
Pahalgam Attack NIA Charge Sheet: एनआईए जांच में पहलगाम आतंकी हमले में स्थानीय मदद और पाकिस्तान कनेक्शन का बड़ा खुलासा हुआ है।
Pahalgam Attack NIA Charge Sheet || iMAGE- PTC News file
- एनआईए चार्जशीट में आतंकियों को स्थानीय गाइडों की मदद मिलने का खुलासा।
- जांच में हमले के तार पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों से जुड़े पाए गए।
- आतंकियों ने अत्याधुनिक हथियारों और बॉडी कैमरों का इस्तेमाल किया था।
श्रीनगर: पिछले साल अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसी एनआईए की चार्जशीट में सामने आया है कि इस हमले में आतंकियों को स्थानीय लोगों की मदद मिली थी। (Pahalgam Attack NIA Charge Sheet) रिपोर्ट के अनुसार, हमले से एक दिन पहले तीन आतंकवादी एक स्थानीय गाइड परवेज के ‘ढोक’ यानी मिट्टी-पत्थर की झोपड़ी में छिपे थे। वहां उन्हें खाना, चाय और दूसरे सामान दिए गए। बदले में आतंकियों ने 3 हजार रुपये दिए थे।
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स्थानीय गाइडों पर गंभीर आरोप
एनआईए सूत्रों के मुताबिक, स्थानीय गाइड परवेज और बशीर अहमद ने आतंकियों की मदद की। आतंकियों ने उनसे सुरक्षा बलों की गतिविधियों और अमरनाथ यात्रा के बारे में जानकारी भी ली। जांच एजेंसी का कहना है कि दोनों गाइड आतंकियों को पहचानते थे, लेकिन उन्होंने पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी। अगर समय रहते सूचना दी जाती, तो 26 लोगों की जान बचाई जा सकती थी। हमले के अगले दिन भी दोनों गाइडों ने आतंकियों को बैसरन पार्क के पास देखा, लेकिन फिर भी सुरक्षा एजेंसियों को खबर नहीं दी। घटना के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए।

पाकिस्तान से जुड़े मिले सबूत
एनआईए जांच में यह भी पता चला है कि आतंकियों के पास मिले मोबाइल फोन पाकिस्तान से खरीदे गए थे। जांच में सामने आया कि एक फोन लाहौर और दूसरा कराची में सप्लाई किया गया था। (Pahalgam Attack NIA Charge Sheet) जांच एजेंसी ने कहा कि इस हमले के तार पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और उसके सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंट फ्रंट से जुड़े हैं।

कैसे हुआ था पहलगाम में हमला?
22 अप्रैल 2025 को दोपहर करीब 2:30 बजे पहलगाम के बैसरन इलाके में पर्यटकों पर हमला किया गया। नकाबपोश आतंकियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गोली चलाने से पहले आतंकियों ने लोगों की पहचान पूछी कि वे हिंदू हैं या मुस्लिम। इस हमले में एक पर्यटक की मौत हो गई, जबकि 12 लोग घायल हुए। इलाके का रास्ता कठिन होने के कारण सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेरकर बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया।

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अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल
जांच में पता चला कि आतंकियों के पास एम-4 कार्बाइन, AK-47 राइफल और बॉडी कैमरे थे। माना जा रहा है कि हमले का वीडियो प्रचार के लिए रिकॉर्ड किया जा रहा था। हमले की जिम्मेदारी TRF ने ली थी। (Pahalgam Attack NIA Charge Sheet) एजेंसियों ने डिजिटल चैट और कॉल रिकॉर्ड के जरिए आतंकियों के पाकिस्तान के कराची और मुजफ्फराबाद स्थित हैंडलरों तक पहुंच बनाई है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, साल 2024 में जम्मू-कश्मीर में मारे गए 60 प्रतिशत आतंकवादी पाकिस्तानी नागरिक थे, जिससे सीमा पार से आतंकवाद की लगातार बढ़ती गतिविधियों का पता चलता है।

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