नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 2030 तक करीब तीन गुना होकर 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। यह वृद्धि कृत्रिम मेधा (एआई), मोटर वाहन क्षेत्र और डेटा सेंटर के तेजी से विस्तार से प्रेरित होगी। लेखा एवं परामर्श कंपनी डेलॉयट की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
‘टेक्नोलॉजी, मीडिया एंड टेलीकम्युनिकेशंस प्रेडिक्शंस 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत अपनी 90 प्रतिशत से अधिक सेमीकंडक्टर जरूरतों का आयात करता है, लेकिन 2035 तक इसमें बड़ा बदलाव आने की संभावना है। घरेलू उत्पादन तब तक देश की 60 प्रतिशत से अधिक मांग को पूरा कर सकता है।
रिपोर्ट कहती है कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का सेमीकंडक्टर बाजार 45-50 अरब डॉलर के बीच आंका गया है। पिछले तीन वर्ष में इसकी वार्षिक वृद्धि दर करीब 20 प्रतिशत रही है। एआई, मोटर वाहन, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के दम पर बाजार 2030 तक 120 अरब डॉलर और 2035 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।
रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल फोन, मोटर वाहन, कंप्यूटिंग व डेटा सेंटर जैसे क्षेत्र 2035 तक देश की कुल सेमीकंडक्टर मांग का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनेंगे। अब तक इस क्षेत्र में 10 स्वीकृत परियोजनाओं के जरिये 19 अरब डॉलर से अधिक का निवेश आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अगले पांच वर्ष में इस उद्योग में 50 अरब डॉलर का अतिरिक्त निवेश आने का अनुमान है जबकि 2030 से 2035 के बीच 75-80 अरब डॉलर का निवेश और हो सकता है जिससे पूरे परिवेश का विस्तार होगा।
इस विस्तार से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी होगा। 2035 तक इस क्षेत्र में करीब 20 लाख नौकरियां उत्पन्न होने का अनुमान है जिनमें 30 प्रतिशत विनिर्माण, 30 प्रतिशत डिजाइन सेवाओं और 40 प्रतिशत अन्य मूल्य श्रृंखला गतिविधियों में होंगी।
रिपोर्ट में हालांकि आगाह किया गया है कि इस प्रगति को बनाए रखने के लिए प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी होगा। इसके लिए नीतिगत ढांचे को समयबद्ध प्रोत्साहन योजना से आगे बढ़ाकर स्थायी राष्ट्रीय कार्यक्रम में बदलने और केंद्र व राज्यों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
भाषा निहारिका अजय
अजय