संसदीय समिति ने जम्मू कश्मीर के पर्यटन स्थलों के लिए एकीकृत सुरक्षा ढांचे की सिफारिश की

संसदीय समिति ने जम्मू कश्मीर के पर्यटन स्थलों के लिए एकीकृत सुरक्षा ढांचे की सिफारिश की

संसदीय समिति ने जम्मू कश्मीर के पर्यटन स्थलों के लिए एकीकृत सुरक्षा ढांचे की सिफारिश की
Modified Date: August 10, 2026 / 12:49 pm IST
Published Date: August 10, 2026 12:49 pm IST

नयी दिल्ली, 10 अगस्त (भाषा) संसद की एक समिति ने जम्मू कश्मीर के सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए केंद्रीयकृत निगरानी सुविधाओं के साथ एक ‘एकीकृत सुरक्षा और निगरानी ढांचा’ बनाने की सिफारिश की है।

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के प्रशासनिक कामकाज, सामाजिक-आर्थिक विकास, सीमा और आंतरिक सुरक्षा, तथा लद्दाख में सीमा सुरक्षा प्रबंधन और तैयारियों पर अपनी रिपोर्ट में, समिति ने कहा कि सुरक्षा से जुड़ी किसी भी घटना पर तालमेल के साथ और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए, हर पर्यटन मौसम से पहले अलग-अलग एजेंसियों के बीच स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रियाएं तय की जाएं और उनकी समीक्षा की जाए।

ये सिफारिशें पिछले साल 22 अप्रैल को पहलगाम की खूबसूरत बैसरन घाटी में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले के बाद की गई हैं। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे।

समिति ने सिफारिश की कि सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए एक एकीकृत सुरक्षा और निगरानी ढांचा विकसित किया जाए, जिसमें व्यापक सीसीटीवी कवरेज, केंद्रीयकृत निगरानी सुविधाएं, नियमित ‘वल्नरेबिलिटी असेसमेंट’ (कमजोरियों का आकलन) और समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट शामिल हों।

समिति ने 11 से 15 मई, 2026 तक जम्मू, श्रीनगर, गुलमर्ग, सोनमर्ग और कारगिल का दौरा किया था।

समिति ने गुलमर्ग पर्यटन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था का ‘मौके पर जाकर जायजा’ लिया; सोनमर्ग में कानून-व्यवस्था की स्थिति के बारे में जम्मू कश्मीर पुलिस के प्रतिनिधियों से बातचीत की; और भारतीय सेना के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के ज़रिए करगिल में सीमा सुरक्षा व्यवस्था और ऑपरेशनल तैयारियों का आकलन किया।

जम्मू कश्मीर में पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए, समिति ने कहा कि इस संदर्भ में पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा प्रबंधन बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि यह सुरक्षा की धारणा, पर्यटकों के अनुभव की गुणवत्ता और पर्यटन क्षेत्र के लगातार विकास पर सीधा असर डालता है।

रिपोर्ट में सुरक्षा बलों की तैयारियों की सराहना करते हुए कहा गया, ‘समिति सिफारिश करती है कि ज़्यादा भीड़-भाड़ वाले सभी पर्यटन स्थलों पर विशिष्ट आपातकालीन प्रतिक्रिया इकाई, जरूरी सुविधाओं से लैस एम्बुलेंस, ट्रॉमा-केयर सुविधाएं और स्पष्ट रूप से चिह्नित निकासी मार्ग उपलब्ध कराए जाएं।’’

समिति ने यह भी कहा कि होटलों, परिवहन के बिंदुओं और पर्यटन सुविधाओं पर आपातकालीन संपर्क नंबर और सुरक्षा निर्देश कई भाषाओं में प्रमुखता से दिखाए जाने चाहिए।

गृह मामलों पर संसदीय स्थायी समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि सुरक्षा से जुड़ी नई चुनौतियों की पहचान करने और उनसे निपटने के लिए समय-समय पर संयुक्त सुरक्षा ऑडिट और कमज़ोरियों का आकलन किया जाना चाहिए, खासकर पर्यटन सीजन और अमरनाथ यात्रा शुरू होने से पहले ऐसा किया जाना चाहिए।

लद्दाख में, समिति ने आधुनिक शस्त्र प्रणाली, मानवरहित वायु प्रणाली, यूएएस प्रौद्योगिकी रोधी प्रणाली, आधुनिक निगरानी उपकरण, खास मोबिलिटी मंच और हर तरह के भूभाग में चलने वाले वाहनों को शामिल किए जाने पर संतोष जताया।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘समिति यह भी सुझाव देती है कि रक्षा मंत्रालय को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सभी क्षेत्रों में इनकी समय पर खरीद, तैनाती और समय-समय पर तकनीक को उन्नत करने का काम सुनिश्चित करना चाहिए।’

भाषा वैभव माधव

माधव


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