संसदीय समिति ने छात्रवृत्ति दिए जाने में देरी पर निराशा जताई, कड़े कदम उठाने की सलाह दी
संसदीय समिति ने छात्रवृत्ति दिए जाने में देरी पर निराशा जताई, कड़े कदम उठाने की सलाह दी
नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) संसद की एक समिति ने कुछ राज्यों में विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने में लगातार हो रही देरी के मुद्दे पर ‘निराशा’ जताई है। समिति ने तय समय में यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए कड़े कदम उठाने की वकालत की है।
भारतीय जनता पार्टी के सांसद पी.सी. मोहन की अध्यक्षता वाली सामाजिक न्याय और अधिकारिता पर संसदीय स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि छात्रों को लगातार देरी का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि कुछ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सत्यापन पूरा करने में महीनों और कुछ मामलों में एक साल तक का समय लेते हैं।
यह समिति की 21वीं रिपोर्ट थी, जिसमें मंत्रालय की 2026-27 के लिए अनुदान की मांगों पर उसकी सिफारिशों पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में बताया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रों को छात्रवृत्ति देने में हो रही देरी को देखते हुए, समिति ने सिफारिश की थी कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग यह सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए कि वजीफा उसी शैक्षणिक वर्ष में दिया जाए जिसके लिए वो देय है।
समिति ने इस बात का संज्ञान लिया कि विभाग ने फिर से वही नपातुला जवाब दिया है कि राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पात्र आवेदकों से आवेदन आमंत्रित करने के लिए जून में पोर्टल खोलता है।
अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में मंत्रालय ने कहा कि अधिकतर राज्य/केंद्र शासित प्रदेश तय समय सीमा के भीतर सत्यापन प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं, लेकिन कुछ राज्य इस प्रक्रिया को अंतिम रूप देने और राज्य के हिस्से के भुगतान का डेटा एनएसपी को भेजने में अतिरिक्त समय लेते हैं, जो कुछ मामलों में कुछ महीनों से लेकर एक साल तक हो सकता है।
विभाग ने कहा, ‘‘इससे केंद्रीय हिस्से की प्रक्रिया और भुगतान में देरी होती है।’’
भाषा वैभव माधव
माधव

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