पार्श्वनाथ डेवलपर्स को घर खरीदारों की बकाया राशि जमा करने के लिए एक हफ्ते की मोहलत

पार्श्वनाथ डेवलपर्स को घर खरीदारों की बकाया राशि जमा करने के लिए एक हफ्ते की मोहलत

पार्श्वनाथ डेवलपर्स को घर खरीदारों की बकाया राशि जमा करने के लिए एक हफ्ते की मोहलत
Modified Date: July 20, 2026 / 06:06 pm IST
Published Date: July 20, 2026 6:06 pm IST

नयी दिल्ली, 20 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पार्श्वनाथ डेवलपर्स को गुरुग्राम में घर खरीदारों के पक्ष में सुनाए गए फैसलों का पालन करने के लिए सोमवार को एक हफ्ते की अंतिम मोहलत देते हुए पूरी रकम 12 फीसदी के ब्याज के साथ शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में जमा कराने को कहा।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने रियल एस्टेट फर्म के निदेशकों के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि आदेश का पालन न करने पर उन्हें जेल भेजा जा सकता है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, ‘‘आपने (रियल एस्टेट कंपनी और उसके निदेशक) पूरे देश को धोखा दिया है। अगर आप एक हफ्ते के अंदर आदेशों का पालन नहीं करते हैं, तो आपको जेल भेज दिया जाएगा। आप पूरी व्यवस्था का माखौल बना रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, “जो हाल यूनिटेक (के निदेशकों) का हुआ था, वही इनका (पार्श्वनाथ डेवलपर्स) भी होगा। पूरी व्यवस्था पर कब्जा कर लिया गया है।”

यह मामला कैंसर से उबरी रीता टिक्कू और लोकेश टिक्कू की ओर से दायर याचिका पर आधारित है, जिन्होंने गुरुग्राम के सेक्टर-53 स्थित ‘पार्श्वनाथ एक्सॉटिका’ परियोजना में अपनी जीवन भर की जमा पूंजी निवेश की थी।

शीर्ष अदालत ने गौर किया कि हरियाणा सरकार ने उसकी ओर से पहले दिए गए निर्देशों के अनुसार वस्तु स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी है।

पीठ ने कहा, “हरियाणा सरकार का कहना है कि अनुपालन हलफनामा दाखिल कर दिया गया है। हालांकि, इसे कल शाम ही दाखिल किया गया था और इसके साथ दस्तावेज नहीं संलग्न किए गए हैं। ऐसा तुरंत किया जाए।”

उसने कहा कि मामले में प्रतिवादी बिल्डर और उसके अधिकारी पेश हुए हैं।

पीठ ने कहा, “उन्हें एचआरईआरए (हरियाणा रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण) के आदेशों का पालन नहीं करने की वजह बताने दें। गैर-जमानती वारंट (जो पहले ही जारी हो चुके हैं) पर अमल करने से पहले हम बिल्डर को आखिरी मौका देते हैं कि वह वसूली योग्य पूरी रकम 12 फीसदी के सालाना ब्याज के साथ उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री में जमा करे।”

न्यायालय ने कहा, “यह राशि एक हफ्ते के भीतर जमा की जाए। इस मामले को अगले सोमवार के लिए सूचीबद्ध करें।”

पीठ ने स्पष्ट किया कि पहले के आदेश के अनुसार “सब कुछ जब्त रहेगा।”

उसने कंपनी की इस दलील को मानने से इनकार कर दिया कि दूसरे घर खरीदार भी उसी इमारत में रह रहे हैं, जहां याचिकाकर्ताओं ने घर बुक किया था।

पीठ ने कहा, “कोई योजना नहीं चाहिए। पहले राशि जमा करें, फिर बात करें। हम (संविधान के) अनुच्छेद 142 के तहत कार्रवाई कर रहे हैं। हमें आईबीसी (दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता) की कार्यवाही, दिवालियापन आदि से कोई मतलब नहीं है।”

प्रधान न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई 27 जुलाई तक टालते हुए कहा, “हमारे आदेश को लेकर कोई गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। अगला कदम जेल है। बस इतना ही।”

संविधान का अनुच्छेद 142 उच्चतम न्यायालय को किसी भी लंबित मामले में “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कोई भी आदेश पारित करने की व्यापक शक्तियां देता है।

शीर्ष अदालत ने घरों का कब्जा पाने के लिए वरिष्ठ नागरिकों की ओर से 20 वर्षों से किए जा रहे संघर्ष का संज्ञान लेते हुए 13 जुलाई को पार्श्वनाथ डेवलपर्स और उसके निदेशकों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए थे तथा कंपनी के प्रबंधन के खिलाफ जमानती वारंट जारी किए थे।

पीठ ने राज्य सरकार, पार्श्वनाथ हेसा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक, पार्श्वनाथ डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम के जिलाधिकारी और हरियाणा के नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग को नोटिस भी जारी किए थे।

न्यायालय ने हरियाणा के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), सभी जिलाधिकारियों और पुलिस आयुक्तों से इन आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और हलफनामे दाखिल करने को कहा था।

पीठ ने आदेश दिया था कि इस दौरान न तो किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बनाया जाएगा और न ही फ्लैट का कब्जा किसी तीसरे पक्ष को दिया जाएगा।

भाषा पारुल सुभाष

सुभाष


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