जम्मू, 20 फरवरी (भाषा) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) विधायक वहीद-उर-रहमान पारा ने जम्मू कश्मीर में लगातार तीन वित्तीय वर्ष में विवाह सहायता के तहत 70 करोड़ रुपये और लाडली बेटी योजना के तहत 200 करोड़ रुपये जारी नहीं किए जाने को लेकर शुक्रवार को उमर अब्दुल्ला सरकार की आलोचना की।
पीडीपी विधायक ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि लाडली बेटी योजना के तहत ‘‘वितरित’’ किए गए 300 करोड़ रुपये में से 200 करोड़ रुपये अब भी लंबित है और विवाह सहायता के तहत ‘‘वितरित’’ के रूप में चिह्नित 234 करोड़ रुपये में से 70 करोड़ रुपये अभी भी सरकारी खजाने में है।
इस मुद्दे पर नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) नीत केंद्र शासित प्रदेश सरकार से सवाल करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अगर 70 करोड़ रुपये और 200 करोड़ रुपये सरकारी खजाने से निकले ही नहीं हैं और अटके पड़े हैं, तो इसे वितरण कैसे कहा जा सकता है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘गरीबों को हाथ में पैसा चाहिए, फाइल में लिखे आंकड़े नहीं।’’
उमर अब्दुल्ला सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर विधानसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी गई जानकारी के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने चालू वित्त वर्ष सहित पिछले तीन वित्तीय वर्षों में विवाह सहायता और लाडली बेटी योजनाओं के तहत 364 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की है।
केंद्र शासित प्रदेश सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, विवाह सहायता योजना के तहत, वर्ष 2023-24 और 2024-25 में क्रमशः 130 करोड़ रुपये की राशि वितरित की गई, जिससे प्रति वर्ष 26,000 लोगों को लाभ मिला।
लिखित उत्तर के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (वर्तमान तिथि के अनुसार 2025-26) के लिए 44,301 लाभार्थियों को 234 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। इसमें कहा गया है, ‘‘इस राशि में सरकारी खजाने में, भुगतान के लिए लंबित 70.08 करोड़ रुपये के बिल भी शामिल हैं।’’
लाडली बेटी योजना के तहत, सरकार ने वित्त वर्ष 2023-24 में कुल 1,41,085 लाभार्थियों को मंजूरी दी और 213.75 करोड़ रुपये वितरित किए। वहीं, वित्त वर्ष 2024-25 में, 1,76,126 लाभार्थियों को मंजूरी दी गई और 150 करोड़ रुपये वितरित किए गए।
केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए (वर्तमान तिथि तक), इस योजना के तहत कुल 1,98,024 लाभार्थियों को मंजूरी दी गई है और 300 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं। हालांकि, 200 करोड़ रुपये की राशि अभी भी लंबित है।
भाषा सुभाष माधव
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