(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 15 सितंबर (भाषा) उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मंगलवार को कहा कि किसी एक देश के फायदे से कहीं ज्यादा जरूरी ‘मानवीय शांति’ और ‘मानवता की शांति’ है तथा इस सिद्धांत पर काम करने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए एक वैश्विक आवाज बनकर उभरा है।
राधाकृष्णन ने कहा कि पिछले दशक में भारतीय कूटनीति का स्वरूप काफी बदल गया है, अब इसमें ज़्यादा जुड़ाव और नए आत्मविश्वास की झलक मिलती है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश यह नहीं कह सकते कि ‘‘आपकी समस्या आपकी समस्या है और मेरी समस्या हमारी समस्या है।’’
उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘‘दुनिया को हर समस्या को अपनी समस्या मानना चाहिए, तभी समाधान मिल सकता है।’’
संसद के एक कानून के जरिए ‘राष्ट्रीय महत्व के संस्थान’ का दर्जा मिलने के बाद ‘इंडियन काउंसिल फॉर वर्ल्ड अफेयर्स’ (आईसीडब्ल्यूए) के 25 साल पूरे होने पर एक कार्यक्रम में राधाकृष्णन ने कहा कि टकराव और विरोधाभासों से जूझ रही दुनिया में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता ‘‘और भी ज़्यादा उल्लेखनीय’’ है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि ब्रिक्स नेताओं का सर्वसम्मत घोषणा-पत्र भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
इस मौके पर जयशंकर ने कहा कि आज भारत कई देशों और क्षेत्रों के साथ बड़े पैमाने पर जुड़ा हुआ है तथा उसके हित तेज़ी से वैश्विक होते जा रहे हैं।
उपराष्ट्रपति आईसीडब्ल्यूए के अध्यक्ष हैं।
यह संस्थान वैश्विक मुद्दों और अंतरराष्ट्रीय मामलों पर जनता को शिक्षित करने एवं उन्हें शामिल करने के काम में लगा हुआ है।
भाषा
राजकुमार मनीषा
मनीषा