पथनमथिट्टा (केरल), 25 फरवरी (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने बुधवार को आरोप लगाया कि राज्य सरकार की उपलब्धियों का संदेश भेजने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में तैनात एक अधिकारी ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के व्यक्तिगत विवरण मांगे।
इसे “बड़ा राजनीतिक विवाद” और “डेटा गोपनीयता का गंभीर उल्लंघन” करार देते हुए चेन्निथला ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के निजी विवरण मांगे।
उन्होंने दावा किया कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के मालिकों सहित कर्मचारियों के निजी विवरण ‘केरल सॉल्यूशंस फॉर मैनेजिंग एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्मेशन एंड ट्रांसफॉर्मेशन प्रणाली’ (केस्मार्ट) तथा ‘सर्विस एंड पेरोल एडमिनिस्ट्रेटिव रिपॉजिटरी फॉर केरल’ (स्पार्क) से मांगे गए।
चेन्निथला ने कहा, “ओएसडी द्वारा 31 दिसंबर, 2025 को जारी पत्र के माध्यम से यह जानकारी मांगी गई थी और 12 फरवरी तक सौंपने का निर्देश दिया गया था। यह डेटा गोपनीयता का गंभीर उल्लंघन है। क्या ओएसडी मुख्यमंत्री की जानकारी या मंजूरी के बिना ऐसा पत्र जारी कर सकते हैं? इसके पीछे बड़ा राजनीतिक षड्यंत्र है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि माकपा और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) द्वारा चुनाव प्रचार के लिए निजी विवरण का उपयोग किया जाना “अवैध” और “अलोकतांत्रिक” है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि ओएसडी के पत्र के अनुसार यह विवरण ‘सेंट्रलाइज्ड नोटिफिकेशन हब फॉर गवर्नमेंट सर्विसेज’ नामक डिजिटल संचार प्रणाली के तहत एकत्र किए गए, जिसे शुरू करने के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (आईपीआरडी) काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार को इस प्रकार अपने कर्मचारियों के निजी विवरण लेने का अधिकार नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री, उनके ओएसडी तथा राज्य के मुख्य सचिव के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की मांग की।
उनकी यह टिप्पणी केरल उच्च न्यायालय द्वारा एक दिन पहले की गई उस टिप्पणी के बाद आई है, जिसमें अदालत ने कहा था कि सीएमओ द्वारा अधिकारियों को राज्य सरकार की उपलब्धियां बताने वाले ईमेल और संदेश भेजना निजता में हस्तक्षेप प्रतीत होता है।
अदालत ने यह टिप्पणी मलप्पुरम के एक कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रशीद अहमद और तिरुवनंतपुरम सचिवालय में लिपिकीय सहायक अनिल कुमार के. एम. की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के संदेश भेजना चुनाव प्रचार के समान है।
राज्य सरकार ने अदालत को आश्वासन दिया कि 27 फरवरी, जो इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख है, तक इस तरह के संदेश नहीं भेजे जाएंगे।
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि विधानसभा चुनाव से पहले, कथित तौर पर राज्य सरकार के कर्मचारियों और विभिन्न योजनाओं के तहत वेतन व लाभ पाने वालों को लक्ष्य कर सीएमओ द्वारा बड़े पैमाने पर संदेश भेजे गए। इन संदेशों पर असंतोष जताते हुए उन्होंने कहा कि ये संदेश मासिक वेतन और लाभ की जानकारी देने के लिए उपलब्ध कराए गए निजी डेटा हासिल कर भेजे गए।
भाषा मनीषा वैभव
वैभव