नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत की शानदार सैन्य सफलता के बाद पाकिस्तान का ‘‘दलाल’’ बन जाना मोदी सरकार की विदेश नीति, कूटनीतिक सक्रियता और विमर्श प्रबंधन की ‘‘भारी नाकामी को दिखाता’’ है।
विपक्षी दल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘‘अत्यधिक व्यक्तित्व-आधारित विदेश नीति’’ के बिखरने ने ‘‘स्वयंभू विश्वगुरु की विश्वफोनी (दिखावा करने वाले) के रूप में पोल खोल’’ दी है।
केंद्र सरकार ने 25 मार्च को पश्चिम एशिया की स्थिति पर एक सर्वदलीय बैठक में कहा था कि इस मामले में पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों में कुछ भी नया नहीं है, क्योंकि उस देश का ‘‘इस्तेमाल’’ अमेरिका द्वारा 1981 से ही किया जा रहा है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संसद परिसर में आयोजित बैठक में उपस्थित लोगों से कथित तौर पर कहा था, ‘‘हम दलाल राष्ट्र नहीं हैं।’’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पाकिस्तान के संदर्भ में लिखा, ‘‘यह एक ऐसा देश है, जहां लोकतंत्र एक मजाक बनकर रह गया है। यह एक ऐसा देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था बदहाल है और जो अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), चीन और सऊदी अरब जैसे कुछ अन्य दाताओं से मिली जीवनरेखा पर निर्भर है। यह एक ऐसा देश है, जिसे दशकों से ऐसे आतंकवादियों के पनाहगाह के रूप में जाना जाता रहा है, जो न केवल अपने पड़ोसियों पर बल्कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हमले करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह एक ऐसा देश है, जिसके साथ (अमेरिका के पूर्व) राष्ट्रपतियों बिल क्लिंटन, (जॉर्ज डब्ल्यू) बुश, (बराक) ओबामा और (जो) बाइडन ने बहुत सख्ती से व्यवहार किया था। नवंबर 2008 में मुंबई में अपने आतंकवादी हमले के बाद अलग-थलग पड़ जाने के बावजूद पाकिस्तान को अब एक नयी स्वीकृति मिल गई है।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘डॉ. एस. जयशंकर के शब्दों में, पाकिस्तान का ‘दलाल’ बन जाना ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारत की शानदार सैन्य सफलता के बाद मोदी सरकार की विदेश नीति, कूटनीतिक सक्रियता और विमर्श प्रबंधन की भारी नाकामी को दिखाता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ (अमेरिका के) राष्ट्रपति (डोनाल्ड) ट्रंप (जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘अच्छे मित्र’ बताए जाते हैं) ने पाकिस्तान की वर्तमान स्वीकार्यता बढ़ाने में निस्संदेह बड़ी भूमिका निभाई है, लेकिन प्रधानमंत्री ने ऐसा क्यों और कैसे होने दिया, जबकि वह सितंबर 2019 में ह्यूस्टन के ‘हाउडी मोदी’ और फरवरी 2020 में अहमदाबाद के ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम के जरिए व्हाइट हाउस (अमेरिका के राष्ट्रपति का अधिकारिक आवास एवं कार्यालय) से अपने खास रिश्तों का बखान करते रहे हैं?’’
उन्होंने दावा किया प्रधानमंत्री ने अमेरिका को खुश करने के लिए कई तरीके अपनाए।
उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि जिस व्यापार समझौते ने भारतीय कृषि बाजारों में अमेरिका को अभूतपूर्व पहुंच दी और जिसे भारत के किसानों के साथ विश्वासघात माना गया, वह भी उन्हें अमेरिका से कोई कूटनीतिक लाभ दिलाने में मदद नहीं कर सका। उन्हें केवल एक झुकने वाले और दब्बू नेता के तौर पर देखा जाता है।’’
रमेश ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री दावा करते हैं कि वे दुनिया भर के नेताओं से लगातार फोन पर बात कर रहे हैं। यह निश्चित रूप से अच्छी बात है कि वे ऐसा कर रहे हैं, लेकिन उनकी अत्यधिक व्यक्तित्व-आधारित विदेश नीति के बिखरने ने स्वयंभू विश्वगुरु की ‘विश्वफोनी’ के रूप में पोल खोल दी है।’’
पाकिस्तान में रविवार को सऊदी अरब, मिस्र और तुर्किये के विदेश मंत्रियों का चतुष्पक्षीय शिखर सम्मेलन होना है, जिसमें पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष एवं शांति के लिए बातचीत के प्रयासों पर चर्चा की जाएगी।
भाषा सिम्मी दिलीप
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