नयी दिल्ली, 27 जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर कर केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को देशभर में अधिक जोखिम वाले सार्वजनिक परिसरों के लिए राष्ट्रीय अग्नि एवं जीवन सुरक्षा रूपरेखा तैयार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि यह रूपरेखा स्कूलों, कोचिंग संस्थानों, छात्रावासों, होटलों, गेस्ट हाउस, बेड-एंड-ब्रेकफास्ट (बीएंडबी) प्रतिष्ठानों, रेस्तरां, मॉल, सिनेमा हॉल, अस्पतालों तथा अधिक भीड़भाड़ वाले अन्य व्यावसायिक परिसरों पर लागू होनी चाहिए।
अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी द्वारा दायर याचिका में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि वे तीन से चार महीने के भीतर अधिक जोखिम वाले सार्वजनिक परिसरों का विशेष अग्नि एवं जीवन सुरक्षा ऑडिट कराएं। इसमें विशेष रूप से कोचिंग हब, स्कूल, अस्पताल, होटल, रेस्तरां, बैंक्वेट हॉल और मॉल को प्राथमिकता देने की मांग की गई है।
याचिका में दिल्ली और लखनऊ सहित देश में आग लगने की कुछ भीषण घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि ऐसी घटनाओं के बार-बार होने का एक प्रमुख कारण अधिक जोखिम वाले सार्वजनिक परिसरों के लिए एक समान और प्रभावी राष्ट्रीय न्यूनतम अग्नि एवं जीवन सुरक्षा रूपरेखा का अभाव है।
गोस्वामी ने याचिका में कहा, ‘‘न्यायिक और प्रशासनिक चेतावनियों के बावजूद बार-बार ऐसी त्रासदियों का होना यह दर्शाता है कि केवल प्राथमिकियां दर्ज करना और घटना के बाद जांच समितियां गठित करना संवैधानिक दृष्टि से पर्याप्त नहीं है। संविधान का अनुच्छेद 21 केवल शोक व्यक्त करने नहीं, बल्कि ऐसी घटनाओं की रोकथाम की मांग करता है।’’
याचिका में केंद्र सरकार और अन्य संबंधित प्राधिकारियों को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से परामर्श कर निर्धारित समय सीमा के भीतर अधिक जोखिम वाले सार्वजनिक परिसरों के लिए राष्ट्रीय न्यूनतम अग्नि एवं जीवन सुरक्षा अनुपालन, ऑडिट, प्रकटीकरण और जवाबदेही की रूपरेखा तैयार करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश जिला-वार हलफनामा दाखिल करें, जिसमें अधिक जोखिम वाले परिसरों का विवरण तथा ऐसे परिसरों की संख्या भी शामिल हो, जिनके पास अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र (फायर एनओसी) नहीं है।
याचिका में कहा गया है कि बेसमेंट, छत, मध्यवर्ती तल, अस्थायी ढांचों और अनधिकृत मंजिलों का उपयोग कक्षाओं, पुस्तकालयों, कोचिंग संस्थानों, रेस्तरां, छात्रावासों अथवा आवासीय व्यवस्था के लिए तब तक नहीं किया जाना चाहिए, जब तक कि उन्हें ऐसे उपयोग की विशेष अनुमति न मिली हो और वे अग्नि एवं जीवन सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन न करते हों।
अन्य मांगों के अलावा याचिका में निर्धारित अवधि के भीतर अंतिम राष्ट्रीय रूपरेखा की सिफारिश करने के लिए राष्ट्रीय विशेषज्ञ समिति के गठन का भी अनुरोध किया गया है।
अंतरिम राहत के तौर पर याचिका में अदालत से यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि दिल्ली के मालवीय नगर और लखनऊ के अलीगंज में हुई आग की घटनाओं से संबंधित सभी निरीक्षण अभिलेख, दमकल विभाग की एनओसी, अधिभोग प्रमाणपत्र, लाइसेंस, सीसीटीवी फुटेज और पत्राचार सुरक्षित रखे जाएं। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि इससे इन मामलों में चल रही आपराधिक जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
तीन जून को दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक बेड-एंड-ब्रेकफास्ट प्रतिष्ठान में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत हो गई थी।
वहीं, 22 जून को लखनऊ के अलीगंज में स्थित तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में लगी भीषण आग में 15 लोगों की मौत हो गई थी और नौ अन्य लोग घायल हो गए थे।
भाषा गोला रंजन
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