नयी दिल्ली, 16 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर केंद्र और दिल्ली सरकार को गरीबों एवं बच्चों को लिए राष्ट्रीय राजधानी में सरकारी स्कूलों में चिकित्सा सुविधाओं से युक्त एकांतवास केंद्र स्थापित करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
याचिका में घर में एकांतवास संबंधी मौजूदा नीति में संशोधन करने का अनुरोध किया गया है। इसमें दलील दी गई है कि यह अधिकांश आबादी के लिए विफल साबित हो रही है क्योंकि हर किसी के पास कोरोना वायरस से संक्रमित परिवार के सदस्य को एकांतवास में रखने के लिए अलग कमरा नहीं होता है।
याचिका में कहा गया, “घर में एकांतवास में रहने की नीति के तहत, संक्रमित व्यक्ति को संलग्न शौचालय के साथ एक अलग कमरा दिया जाना चाहिए ताकि परिवार के अन्य सदस्यों के साथ उसका शारीरिक संपर्क न हो सके। संक्रमित व्यक्ति की देखभाल के लिए भी एक व्यक्ति होना चाहिए।”
इसमें कहा गया,“लेकिन असल में, कितने कम आय वर्ग वाले घरों में संलग्न शौचालय के साथ अलग कमरा और संक्रमित व्यक्ति की देखभाल के लिए अलग से एक व्यक्ति होता है। इसकी वजह से, परिवार के अन्य सदस्य भी संक्रमित हो रहे हैं जिससे शहर के अस्पतालों पर मरीजों का बोझ बढ़ रहा है और सबसे बड़ी समस्या तो परिवार के लोगों को हो रही है।”
जनहित याचिका में बच्चों के लिए स्वास्थ्य देखभाल प्रबंधन केंद्र एवं एकांतवास केंद्रों का इस आधार पर अनुरोध किया गया है कि कई चिकित्सा विशेषज्ञों ने वैश्विक महामारी की तीसरी लहर की आशंका जताई है और इसमें बच्चों के अधिक संक्रमित होने का खतरा बताया है।
भाषा
नेहा प्रशांत
प्रशांत