तिरुवनंतपुरम, 28 जून (भाषा) केरल के स्थानीय स्वशासन मंत्री के. एम. शाजी ने रविवार को स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर वाले प्रतीक चिह्न को प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत बनाए गए मकानों पर प्रदर्शित करने में कोई दिक्कत नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया के एक वर्ग ने उनकी टिप्पणी को गलत ढंग से पेश किया।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेता शाजी ने कहा कि उनकी टिप्पणी केवल प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के आधिकारिक प्रतीक चिह्न तक सीमित थी।
उन्होंने आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा कि वे ऐसा कोई पीएमएवाई प्रतीक चिह्न दिखाएं, जिस पर प्रधानमंत्री की तस्वीर हो।
शाजी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैंने कहा था कि पीएमएवाई का प्रतीक चिह्न प्रदर्शित करने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन ऐसी खबरें प्रकाशित हुईं कि मैंने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर वाले प्रतीक चिह्न को प्रदर्शित करने में भी कोई दिक्कत नहीं है।’’
विपक्षी वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) पर निशाना साधते हुए शाजी ने कहा कि ‘छद्म आदर्शवाद’ के नाम पर एक लाख से अधिक गरीब परिवारों को नए मकानों से वंचित करना समाज के साथ बड़ा अन्याय होगा।
मंत्री ने कहा, ‘‘जब हम इस परियोजना को लागू करेंगे, तब 1.2 लाख से अधिक गरीब परिवारों को नए मकान मिलेंगे। किसी प्रतीक चिह्न के नाम पर गरीबों के मकान मत रोकिए। मुझे ऐसा कोई पीएमएवाई प्रतीक चिह्न दिखाइए, जिस पर प्रधानमंत्री की तस्वीर हो।’’
शाजी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस योजना का नाम ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ है और इसमें प्रधानमंत्री मोदी या किसी अन्य प्रधानमंत्री का नाम या तस्वीर नहीं है। इसमें केवल प्रधानमंत्री के आधिकारिक पदनाम का उल्लेख है।
स्थानीय स्वशासन मंत्री ने पूर्ववर्ती मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नीत एलडीएफ सरकार पर आरोप लगाया कि उसने वैचारिक कारणों से नहीं, बल्कि राज्य की वित्तीय हिस्सेदारी देने में असमर्थता के कारण पीएमएवाई समझौते से खुद को अलग कर लिया था।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘वाम सरकार ने आदर्शों का हवाला देते हुए धीरे-धीरे इससे दूरी बना ली, जबकि वास्तविक कारण वित्तीय संकट था। वह राज्य का हिस्सा देने में सक्षम नहीं थी।’’
शाजी ने कहा कि एक मकान बनाने में लगभग सात लाख रुपये की आवश्यकता होती है, जबकि केंद्र सरकार केवल करीब चार लाख रुपये देती है। ऐसे में राज्य का योगदान बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब केरल को केंद्र से कम धनराशि मिल रही है, तब अनावश्यक विवाद खड़ा कर गरीबों को मकानों से क्यों वंचित किया जाए?’’
शाजी ने यह भी सवाल उठाया कि जब वाम दल ने अपनी आवास योजना का नाम दिवंगत मार्क्सवादी नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री ई. एम. एस. नंबूदरीपाद के नाम पर रखा है, तो वह पीएमएवाई के नाम का विरोध क्यों कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘वाम दल ने स्वयं अपनी आवास योजना के साथ ईएमएस का नाम जोड़ा। यदि अब वे पीएमएवाई के नाम पर आपत्ति जता रहे हैं, तो क्या यह ईएमएस का अपमान नहीं है? मैं ईएमएस आवास योजना का विरोध नहीं कर रहा, लेकिन इसे शुरू करने वालों को बताना चाहिए कि वे पीएमएवाई का विरोध क्यों कर रहे हैं।’’
शाजी ने दावा किया कि पिछली एलडीएफ सरकार ने अपने कार्यकाल में पीएमएवाई के तहत लगभग 1.6 लाख मकान सौंपे थे।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि उन मकानों में से किसी पर भी प्रधानमंत्री की तस्वीर लगी हो, तो मैं मान लूंगा कि मैं गलत था। लेकिन कहीं भी ऐसी कोई तस्वीर नहीं है।’’
इस बीच, माकपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ए. के. बालन ने रविवार को शाजी पर तंज कसते हुए कहा कि उनमें ‘काफी बदलाव’ आ गया है।
बालन ने संवाददाताओं से बातचीत में व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ‘‘शाजी में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है।’’
माकपा नेता ने आरोप लगाया कि शाजी का रुख संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के नहीं, बल्कि भाजपा के पक्ष में है। बालन ने दावा किया कि न तो शाजी और न ही यूडीएफ केंद्र सरकार के खिलाफ बोलेंगे।
शाजी ने शनिवार को कहा था कि मकानों पर योजना के प्रतीक चिह्न को प्रदर्शित करने के मुद्दे पर पीएमएवाई के तहत मिलने वाली केंद्रीय सहायता को रोकने की कोई आवश्यकता नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा था कि यदि पीएमएवाई का प्रतीक चिह्न योजना का हिस्सा है, तो उसे प्रदर्शित करने में कोई आपत्ति नहीं है और कल्याणकारी योजनाओं को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
उनकी इस टिप्पणी की स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने आलोचना की थी। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एम. शिवप्रसाद ने आईयूएमएल नेता पर सत्ता के लिए ‘अल्पसंख्यक राजनीति’ से समझौता करने का आरोप लगाया।
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