Petrol Diesel Price Hike: आम आदमी को फिर लगेगी महंगाई की तगड़ी मार! इतने रुपए तक महंगा हो सकता है पेट्रोल और डीजल, 5 राज्यों में चुनाव के बाद हो सकता है फैसला

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आम आदमी को फिर लगेगी महंगाई की तगड़ी मार! इतने रुपए तक महंगा हो सकता है पेट्रोल और डीजल, Petrol Diesel Price Hike After 5 States Assembly Election

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  • Publish Date - April 14, 2026 / 05:23 PM IST,
    Updated On - April 14, 2026 / 05:27 PM IST
HIGHLIGHTS
  • आम आदमी को फिर लगेगा महंगाई का झटका
  • देश में बढ़ सकते हैं पेट्रोल और डीजल के दाम
  • चुनाव के बाद मोदी सरकार ले सकती है बड़ा फैसला

नई दिल्लीः Petrol Diesel Price Hike: आम आदमी को महंगाई का एक और झटका लग सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर जल्द ही देश में पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ सकता है। देश में पेट्रोल ₹18 और डीजल ₹35 प्रति लीटर तक महंगे हो सकते हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि देश के 5 राज्यों में चुनाव के बाद इसका फैसला हो सकता है। अगर इस पर मुहर लगती है तो आम आदमी पर सीधे महंगाई की मार पड़ सकती है।

Petrol Diesel Price Hike: रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद देश में फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे गए हैं, जिससे तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कच्चे तेल के महंगे होने से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां प्रति लीटर पेट्रोल पर करीब ₹18 और डीजल पर ₹35 तक का घाटा झेल रही हैं। पिछले महीने के उच्चतम स्तर पर यह नुकसान प्रतिदिन करीब ₹2,400 करोड़ तक पहुंच गया था। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा एक्साइज ड्यूटी में ₹10 की कटौती के बाद यह नुकसान घटकर लगभग ₹1,600 करोड़ प्रतिदिन रह गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर की वृद्धि से कंपनियों का नुकसान करीब ₹6 प्रति लीटर बढ़ जाता है। ऐसे में यह संभव बात मानी जा रही है कि भारत में पेट्रोल ₹18 और डीजल ₹35 प्रति लीटर तक महंगे हो सकते हैं।

88% कच्चा तेल आयात करता है भारत

भारत अपनी जरूरत का लगभग 88% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से 45% मिडिल ईस्ट और 35% रूस से आता है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें न केवल तेल कंपनियों, बल्कि देश के चालू खाता घाटे (CAD) के लिए भी खतरा हैं। अनुमान है कि 2026 की पहली तिमाही में यह घाटा बढ़कर 20 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। बता दें कि सरकारी राजस्व में तेल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी का योगदान लगातार कम हो रहा है। वित्त वर्ष 2017 में यह 22% था, जो अब घटकर सिर्फ 8% रह गया है। अगर सरकार पूरी एक्साइज ड्यूटी हटा भी दे, तो भी मौजूदा कीमतों पर तेल कंपनियों का घाटा पूरी तरह खत्म नहीं होगा।

भारत में कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?

जून 2010 तक सरकार पेट्रोल की कीमत निर्धारित करती थी और हर 15 दिन में इसे बदला जाता था। 26 जून 2010 के बाद सरकार ने पेट्रोल की कीमतों का निर्धारण ऑयल कंपनियों के ऊपर छोड़ दिया। इसी तरह अक्टूबर 2014 तक डीजल की कीमत भी सरकार निर्धारित करती थी। 19 अक्टूबर 2014 से सरकार ने ये काम भी ऑयल कंपनियों को सौंप दिया। अभी ऑयल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत, एक्सचेंज रेट, टैक्स, पेट्रोल-डीजल के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और बाकी कई चीजों को ध्यान में रखते हुए रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमत तय करती हैं।

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