इबादतगाहों को सुधार, शिक्षा और मार्गदर्शन के केंद्रों के रूप में कार्य करना चाहिए: मीरवाइज

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इबादतगाहों को सुधार, शिक्षा और मार्गदर्शन के केंद्रों के रूप में कार्य करना चाहिए: मीरवाइज

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  • Publish Date - May 17, 2026 / 07:01 PM IST,
    Updated On - May 17, 2026 / 07:01 PM IST

श्रीनगर, 17 मई (भाषा) कश्मीर के प्रमुख मौलवी मीरवाइज उमर फारूक ने रविवार को कहा कि मस्जिदों, दरगाहों और इमामबाड़ों जैसे धार्मिक स्थलों को सामाजिक सुधार के केंद्रों के रूप में कार्य करना चाहिए।

मीरवाइज ने यहां एक धार्मिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘हमारी मस्जिदें, खानकाह और इमामबाड़े समाज में सकारात्मक बदलाव और सुधार लाने के केंद्र बनने चाहिए। उन्हें युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन करना चाहिए, जागरूकता फैलानी चाहिए, नैतिक मूल्यों को मजबूत करना चाहिए और हमारे लोगों को प्रभावित करने वाली समस्याओं का समाधान करने में मदद करनी चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि ये स्थल न केवल प्रार्थना के स्थान हैं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से सुधार, शिक्षा, मार्गदर्शन और सामाजिक परिवर्तन के जीवंत केंद्रों के रूप में भी कार्य करते रहे हैं।

मीरवाइज ने कहा कि इस्लामी इतिहास में धार्मिक संस्थानों ने नैतिक चेतना को आकार देने, सांप्रदायिक सद्भाव को मजबूत करने और समाज के सामने आने वाली सामाजिक एवं नैतिक चुनौतियों का समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान समय में, जब समाज बढ़ती राजनीतिक, नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तो इन इबादतगाहों की वास्तविक भूमिका को पुनर्जीवित करने की तत्काल आवश्यकता है।’’

भाषा शफीक सुरेश

सुरेश