प्रधानमंत्री ने रिकॉर्ड बनाने वाले धावकों से बातचीत की, ‘मन की बात’ में केरल की तैराकी पहल का जिक्र
प्रधानमंत्री ने रिकॉर्ड बनाने वाले धावकों से बातचीत की, ‘मन की बात’ में केरल की तैराकी पहल का जिक्र
(तस्वीर सहित)
नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने वाले धावकों गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर से रविवार को बातचीत की और कहा कि राष्ट्रीय वरिष्ठ एथलेटिक्स महासंघ प्रतियोगिता में पुरुषों की 100 मीटर दौड़ की पूरे देश में चर्चा हो रही है।
प्रधानमंत्री के मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के दौरान यह बातचीत हुई। इसमें मोदी ने झारखंड के रांची में हाल में संपन्न प्रतियोगिता में विभिन्न स्पर्धाओं में नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ियों के प्रदर्शन का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता में चार अलग-अलग स्पर्धाओं में चार राष्ट्रीय रिकॉर्ड टूटे।
मोदी ने कहा, ‘‘गुरिंदरवीर सिंह, विशाल टीके, तेजस्विन शंकर, देव मीणा और कुलदीप कुमार। इन साथियों ने अलग-अलग श्रेणियों में नए रिकॉर्ड बनाए। मैं सबसे पहले तो इन सभी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘एक स्पर्धा जिसकी पूरे देश में बहुत चर्चा हो रही है, वह है 100 मीटर दौड़। सिर्फ दो दिन के भीतर पुरुषों की 100 मीटर दौड़ का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा। यह उपलब्धि हासिल करने वाले दो खिलाड़ी गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर हैं।’’
इसके बाद दोनों खिलाड़ियों ने रेडियो कार्यक्रम के दौरान अपनी खेल यात्रा और अनुभव साझा किए।
मोदी ने कहा, ‘‘गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर के साथ यह बातचीत बहुत खास रही, जिससे यह झलक मिलती है कि भारतीय एथलेटिक्स का भविष्य बहुत उज्ज्वल है।’’
केरल के आलुवा में साजी वलाशेरिल द्वारा संचालित तैराकी क्लब का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि वहां दिव्यांग लोगों सहित 15,000 से अधिक लोगों ने तैराकी सीखी है।
उन्होंने कहा, ‘‘साजी ने दिव्यांग बच्चों को भी तैराकी सिखाई है। इस प्रयास के पीछे एक पीड़ा भी छिपी है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ वर्ष पहले एक नाव हादसे में कई विद्यार्थियों की मौत होने के बाद साजी ने यह पहल शुरू की थी।
मोदी ने कहा, ‘‘उस घटना ने साजी को भीतर तक झकझोर दिया। उन्होंने सोचा, अगर बच्चों को तैरना आता होता, तो शायद कई जानें बच जातीं – बस यहीं से शुरू हुआ उनका ये अभियान।’’
अपनी हालिया पांच देशों की यात्रा के दौरान नीदरलैंड द्वारा लौटाई गईं चोल काल की ताम्र पट्टिकाओं का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें भारत और विदेश से इनके बारे में लोगों के संदेश मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘इन ताम्र पट्टिकाओं को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा है। इसलिए आज मैं इससे जुड़ी कुछ बातें आपसे साझा करना चाहता हूं। इनमें 21 बड़ी और तीन छोटी ताम्र पट्टिकाएं हैं। ये मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोल-प्रथम द्वारा अपने पिता राजा राजराजा चोल के एक वचन को पूरा करने से जुड़ी हैं।’’
मोदी ने बताया कि इन पट्टिकाओं में आनइमंगलम् गांव को एक बौद्ध विहार को दान देने का उल्लेख है और इनमें चोल वंश की उपलब्धियों का भी वर्णन मिलता है।
उन्होंने कहा, ‘‘इनसे पता चलता है कि चोल साम्राज्य की समुद्री शक्ति कितनी मजबूत थी। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ उनके संबंधों की जानकारी भी इनमें मिलती है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि खगोल विज्ञान ने भारतीयों की कई पीढ़ियों को आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि ‘बेंगलुरु एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी’ ने ग्रामीण क्षेत्रों में इस विषय को लोकप्रिय बनाने के लिए एक अभियान शुरू किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘रात में तारों को निहारना अपने आप में एक मनमोहक अनुभव है। ‘एस्ट्रो केरल’ नाम का एक संगठन रात्रिकालीन अवलोकन शिविर और कार्यशालाएं आयोजित करता है। यहां युवा दूरबीन बनाना और तारामंडल मानचित्रों का उपयोग करना सीखते हैं।’’
मोदी ने कहा, ‘‘राजकोट के ‘बिग बैंग एस्ट्रोनॉमी क्लब’ ने गिर के जंगलों से लेकर कच्छ के रण तक कई खगोल विज्ञान कार्यक्रम आयोजित किए हैं।’’
प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु के नागरकोइल की शिक्षाविद गिरिजा अम्मा का भी उल्लेख किया, जो चेन्नई के जयगोपाल गरोडिया हिंदू विद्यालय सहित 15 स्कूल चलाती हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका देशभक्ति का भाव हर भारतीय को प्रेरित करता है।
मोदी ने कहा, ‘‘उन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरणा लेकर देश के अनेक सैनिकों के लिए योगदान का संकल्प लिया। इसके लिए उन्होंने अपने सभी विद्यालयों के छात्रों को प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों से कहा कि वे वीर जवानों के लिए हर दिन एक रुपया योगदान दें। यानी एक साल में हर छात्र की ओर से 365 रुपये जमा हुए। इन छोटे-छोटे योगदानों से करीब 40 लाख रुपये एकत्र हुए।’’
मोदी ने बताया कि बाद में गिरिजा अम्मा ने पूरी राशि का चेक सौंपा।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह भारत माता के प्रति उनके गहरे समर्पण को दर्शाता है।’’
मोदी ने कहा कि चेन्नई के पहले हिंदू स्कूल ने पिछले वर्ष अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे किए।
उन्होंने कहा, ‘‘देश की शिक्षा और सांस्कृतिक गौरव को आगे बढ़ाने में इस स्कूल नेटवर्क की भूमिका सराहनीय है। मैं इससे जुड़े सभी लोगों को बधाई देता हूं और हमारे वीर सैनिकों के लिए योगदान देने वाले विद्यार्थियों की विशेष रूप से सराहना करता हूं। भारत के हर गांव और हर शहर में कुछ न कुछ ऐसा हो रहा है, जो हमें प्रेरित करता है।’’
मोदी ने देशभर में तापमान बढ़ने के मद्देनजर लोगों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहने की भी अपील की।
उन्होंने कहा, ‘‘देश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें। अगर धूप में बाहर निकलना जरूरी हो, तो सावधानी और जरूरी एहतियात बरतें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पानी पीते रहें। इस संबंध में विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों को भी न भूलें।’’
मोदी ने फलों के राजा आम का भी उल्लेख करते हुए कहा कि गर्मी के मौसम में शायद ही कोई घर हो, जहां आम की चर्चा न होती हो। उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र का अपना आम और उसकी अपनी सुगंध होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘महाराष्ट्र का हापुस या अल्फांसो, गुजरात का केसर- ये तो आमरस की जान हैं। उत्तर प्रदेश का दशहरी और मेरी काशी का लंगड़ा। बिहार का जर्दालू जिसकी खुशबू दूर से पहचान में आ जाए। चौसा, मालदा…हर नाम के साथ लोगों की यादें जुड़ी हुई हैं।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोई दक्षिण भारत जाए तो उसे बंगनपल्ली, तोतापुरी, नीलम, मलगोवा, पश्चिम बंगाल के हिमसागर, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के सुवर्णरखा जैसी अन्य किस्में मिलेंगी।
उन्होंने कहा, ‘‘यानी, जगह बदलती है और साथ ही आम का रूप-रंग एवं उसका स्वाद भी बदल जाता है … आम की यह यात्रा अब गांवों से वैश्विक बाजार तक भी पहुंच रही है।’’
भाषा सिम्मी दिलीप
दिलीप

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