प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता के लिये केरल के निवासी राजप्पन की प्रशंसा की

Ads

प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता के लिये केरल के निवासी राजप्पन की प्रशंसा की

  •  
  • Publish Date - January 31, 2021 / 11:16 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:11 PM IST

कोट्टायम (केरल), 31 जनवरी (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता के लिये केरल के निवासी राजप्पन की प्रशंसा की है।

गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के प्रमुख एरिक सोल्हेम ने 14 जनवरी को एक छोटी सी वीडियो ट्वीट की थी, जिसमें लकवे से पीड़ित एन एस राजप्पन अपनी दिव्यांगता के बावजूद केरल की वेम्बनाड झील से प्लास्टिक का कचरा एकत्रित करते दिख रहे थे। सोल्हेम ने कहा था कि राजप्पन प्रशंसा के पात्र हैं।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को अपने ”मन की बात” कार्यक्रम में स्वच्छता के प्रति प्रतिबद्धता के लिये राजप्पन की प्रशंसा कर उनके प्रयासों को एक पहचान दी।

मोदी ने कहा कि सभी को उनसे सीख लेनी चाहिये और जहां तक संभव हो, स्वच्छता में योगदान देना चाहिये।

यहां कुमाराकोम में झील में अपनी छोटी सी नौका में बैठे बुजुर्ग व्यक्ति राजप्पन ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा उनके प्रयासों की प्रशंसा किये जाने से वह ”बहुत खुश” हैं।

मोदी ने मन की बात 2.0 के 20वें संस्करण में कहा कि कोट्टायम के दिव्यांग वृद्ध व्यक्ति की खबर हमें ”हमारी जिम्मेदारियों का एहसास दिलाती है।”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”केरल के कोट्टायम में एक दिव्यांग बुजुर्ग हैं, जिनका नाम एन एस राजप्पन साहब है। लकवे से पीड़ित होने के चलते वह चलने में असमर्थ हैं। लेकिन इससे स्वच्छता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।”

मोदी ने कहा कि राजप्पन बीते कई वर्षों से वेम्बनाड झील में अपनी नाव चला रहे हैं और झील में फेंकी गईं प्लास्टिक की बोतलों को बाहर निकालने का काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ”राजप्पन जी से प्रेरणा लेकर हमें भी जहां तक संभव हो स्वच्छता में अपना योगदान देना चाहिये।”

राजप्पन ने कहा कि वह झील से कूड़ा एकत्रित कर अपनी आजीविका चला रहे हैं।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ”मेरे शरीर का घुटने से नीचे का हिस्सा लकवाग्रस्त है। मैं चल नहीं सकता। मैं कल भी प्लास्टिक की बोलतें इकट्ठा करने झील में गया था। मैंने बेकार बोतलों के चार बोरे इकट्ठा कर लिये। ”

राजप्पन ने कहा कि वह बीते 17 वर्षों से यह काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, ”मैं प्रतिदिन नाव में बैठकर बेकार बोलतें इकट्ठा करने निकल जाता हूं।”

राजप्पन से जब उनकी इच्छाओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि उनके मकान की हालत जर्जर हो चुकी है।

उन्होंने कहा, ”मैं एक मकान चाहता हूं। मेरे मकान में एक पर्याप्त छत भी नहीं है।”

भाषा जोहेब नरेश

नरेश