खाद्य उद्योग गुणवत्ता आश्वासन, उपभोक्ताओं से पारदर्शी संवाद पर ध्यान देः एफएसएसएआई

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खाद्य उद्योग गुणवत्ता आश्वासन, उपभोक्ताओं से पारदर्शी संवाद पर ध्यान देः एफएसएसएआई

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  • Publish Date - July 16, 2026 / 09:36 PM IST,
    Updated On - July 16, 2026 / 09:36 PM IST

नयी दिल्ली, 16 जुलाई (भाषा) खाद्य नियामक एफएसएसएआई ने सोशल मीडिया पर बढ़ती शिकायतों के बीच बृहस्पतिवार को खाद्य उद्योग से कहा कि वे उसके नियमों का पूरी तरह पालन करें, गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली को मजबूत करें, डिजिटल पहचान अपनाएं और ग्राहकों के साथ स्पष्ट संवाद करें।

इसके साथ ही भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकार (एफएसएसएआई) ने खानपान के सामान से होने वाली बीमारियों के फैलने की किसी भी घटना से निपटने के लिए कहा कि वह एक मजबूत डिजिटल शिनाख्त प्रणाली अपनाएगी।

पिछले कुछ महीनों में, एफएसएसएआई ने ई-कॉमर्स मंचों समेत कई खाद्य व्यवसाय परिचालकों (एफबीओ) को उत्पादों की गुणवत्ता से जुड़ी ग्राहकों की शिकायतों पर नोटिस जारी किए हैं। इसने ‘एनर्जी ड्रिंक’ बनाने वालों और शराब कंपनियों के ख़िलाफ गुमराह करने वाले दावों और गलत सूचना देने के आरोपों पर कार्रवाई की है।

एफएसएसएआई के सलाहकार (गुणवत्ता आश्वासन) और अतिरिक्त प्रभार (विज्ञान, मानक और विनियमन खंड) सत्येन कुमार पांडा ने उद्योग मंडल फिक्की के एक सम्मेलन में कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र मूल्यवर्धन बढ़ाने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और निर्यात को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि प्रसंस्करण के स्तर को बढ़ाने और बर्बादी को कम करने की जरूरत है।

पांडा ने कहा, ‘‘ग्राहकों की उम्मीदें तेजी से बदल रही हैं। आपने खाद्य सुरक्षा से जुड़ी सोशल मीडिया पर नाराजगी देखी होगी। हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर जो चिंता जताई गई है, उससे एफएसएसएआई पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन जिस तरह से पिछले दो सालों में यह मामला बढ़ा है, उस पर उद्योग और नियामक दोनों को आत्म-मंथन करने की जरूरत है।’’

उन्होंने कहा कि सुरक्षित, पौष्टिक, सस्ती और टिकाऊ खाने की चीजों की मांग बढ़ रही है।

पांडा ने कहा कि एफएसएसएआई विज्ञान पर आधारित, अनुमान लगाने योग्य और प्रगतिशील नियामकीय ढांचा बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। एफएसएसएआई ने 21 वैज्ञानिक समितियों और विशेषज्ञ समितियों का पुनर्गठन किया है।

पांडा ने कहा कि एफएसएसएआई खाद्य परीक्षण बुनियादी ढांचे को मजबूत करना जारी रखे हुए है और प्रयोगशाला बनाने के लिए राज्य सरकारों को धन दे रहा है।

भाषा राजेश राजेश प्रेम

प्रेम