परिसीमन, एफसीआरए विधेयक पर सर्वदलीय बैठक बुलाएं प्रधानमंत्री मोदी : तृणमूल सांसद डेरेक ओब्रायन

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परिसीमन, एफसीआरए विधेयक पर सर्वदलीय बैठक बुलाएं प्रधानमंत्री मोदी : तृणमूल सांसद डेरेक ओब्रायन

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  • Publish Date - July 19, 2026 / 05:33 PM IST,
    Updated On - July 19, 2026 / 05:33 PM IST

नयी दिल्ली, 19 जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओब्रायन ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन पर सरकार के प्रस्तावित “कठोर” कानून और विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) में संशोधन से जुड़े विधेयक पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने का आग्रह किया।

ओब्रायन ने पत्र में कहा कि हालांकि, मानसून सत्र के लिए जारी संसद की कार्यसूची में परिसीमन से जुड़ा कोई विधेयक शामिल नहीं है, लेकिन महत्वपूर्ण कानूनों से निपटने के सरकार के “संदिग्ध रिकॉर्ड” को देखते हुए विपक्ष चिंतित है।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, 2019 का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यह विधेयक सांसदों को कार्यसूची की पूरक सूची जारी किए जाने से पहले ही राज्यसभा में पेश कर दिया गया था।

ओब्रायन ने सरकार से आग्रह किया कि वह परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर इसी तरह के “गुप्त और छल-कपट भरे हथकंडे” न अपनाए।

उन्होंने लोकसभा में 16 अप्रैल को पेश संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, केंद्र-शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक का भी जिक्र करते हुए कहा कि ये विधेयक जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर पाए और अगले ही दिन इन्हें नामंजूर कर दिया गया।

एफसीआरए संशोधन विधेयक के बारे में ओब्रायन ने कहा कि मानसून सत्र में चर्चा और पारित किए जाने के लिए सूचीबद्ध यह विधेयक देश के सबसे गरीब और वंचित समुदायों के बीच काम करने वाले संस्थानों को कमजोर कर देगा।

उन्होंने दावा किया कि प्रस्तावित संशोधनों से ईसाई समुदाय की ओर से संचालित हजारों शैक्षणिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित धर्मार्थ संगठनों के कामकाज पर अत्यधिक सरकारी नियंत्रण स्थापित हो जाएगा, जिससे उन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

पत्र में तृणमूल सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान के अनुच्छेद 19 और 26 की रक्षा की जानी चाहिए।

उन्होंने बाद में निरस्त किए गए तीन कृषि कानूनों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वह “मनमाने तरीके से बनाए जा रहे एक और कानून” को लागू करने से पहले एक सर्वदलीय बैठक बुलाएं।

भाषा पारुल प्रशांत

प्रशांत