नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उज्बेकिस्तान की दो-दिवसीय यात्रा को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया और कहा कि इस दौरान यूरेनियम आपूर्ति, व्यापार, अहम खनिजों और बौद्ध विरासत के संरक्षण सहित कई अहम समझौते हुए।
प्रधानमंत्री मोदी और उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव के बीच रविवार की बातचीत के बाद, दोनों देशों ने अपने संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने और 2030 तक सालाना द्विपक्षीय व्यापार को पांच अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया।
मोदी 29 से 30 अगस्त तक उज्बेकिस्तान की राजकीय यात्रा पर थे।
भाजपा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने यहां संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा ‘ऐतिहासिक’थी।
उन्होंने कहा, ‘‘उज्बेकिस्तान का दौरा ऐतिहासिक था। पूरे देश को याद है कि यह वही ताशकंद है, जहां एक समय हमारे पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का रहस्यमय परिस्थितियों में निधन हो गया था।’’
त्रिवेदी ने कहा कि माना जाता था कि उस समय कई ‘‘प्रतिगामी ताकतें’’ थीं जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता के खिलाफ थीं।
उन्होंने कहा,‘‘माना जाता है कि उस समय कई ऐसी प्रतिगामी ताकतें थीं जो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के आत्मनिर्भर बनने के पक्ष में नहीं थीं, जिसकी शुरुआत शास्त्री जी ने की थी।’’
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘‘आज, 60 साल बाद, उसी देश के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूरेनियम की आपूर्ति और उसकी निरंतरता बनाए रखने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता किया है, ताकि हमारी परमाणु ऊर्जा की निरंतरता और स्थिरता सुनिश्चित हो सके। यह भविष्य में भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक मील का पत्थर है।’’
उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से यह भी संकेत मिलता है कि पिछले छह दशकों में इतिहास की धारा कैसे बदली है।
त्रिवेदी ने कहा, ‘‘इससे यह भी ज्ञात होता है कि इन 60 वर्षों में मोदी सरकार के तहत इतिहास की धारा पूरी तरह बदल गई है।’’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की यात्रा भारत की ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक हितों के साथ-साथ व्यापार और अहम खनिजों के नजरिए से भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान, हमारी ऊर्जा जरूरतों और रणनीतिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए, यूरेनियम की आपूर्ति के अलावा, 2030 तक व्यापार को एक अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़ाकर पांच अरब अमेरिकी डॉलर करने का लक्ष्य तय किया गया है।’’
त्रिवेदी ने कहा, ‘‘महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति के लिए भी एक समझौता हुआ है। इसलिए, व्यापार के नजरिए से भी यह अहम है।’’
उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान के साथ भारत के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए इस यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण फैसला भी लिया गया।
त्रिवेदी ने कहा, ‘‘इस यात्रा के दौरान, भारत के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों के नजरिए से एक बेहद अहम फ़ैसला लिया गया है, जिसके तहत उज्बेकिस्तान के तेरमेज इलाके में मौजूद बौद्ध स्थलों के जीर्णोद्धार और संरक्षण का काम किया जाएगा।’’
उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर हिंदी के लिए 100 छात्रवृत्ति देने और ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ़ ओरिएंटल स्टडीज में आईसीसीआर संस्कृत पीठ की स्थापना के प्रावधान का भी जिक्र किया।
त्रिवेदी ने कहा कि इन पहलों से स्पष्ट होता है कि मोदी के नेतृत्व में भारत अपने पुराने सांस्कृतिक संबंधों को पुनर्जीवित करने और दूसरे देशों के साथ प्रगाढ़ सांस्कृतिक संबंध बनाने की कोशिश कर रहा है।
भाषा
धीरज माधव
माधव