नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को कहा कि ‘पीएम केयर्स फंड’ का इस्तेमाल ग्रामीण स्कूलों में बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और 1,000 से ज्यादा नए अत्याधुनिक स्कूल बनाने के लिए किया जा सकता है।
दीपके ने ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमियों को उजागर करने के लिए ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू किया है।
उन्होंने दावा किया कि देश के बच्चे अपने स्कूलों तक अच्छी सड़कों और स्कूलों में बेंच व पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं।
हालिया ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन स्थिति राहत कोष (पीएम केयर्स फंड) में कुल राशि 8,452 करोड़ रुपये थी, जो एक साल पहले 7,173 करोड़ रुपये थी।
साल 2024-25 के दौरान इसका कुल भुगतान 87.85 लाख रुपये था, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 15.6 करोड़ रुपये था।
दीपके ने ‘एक्स’ पर एक वीडियो बयान में कहा, ‘‘एक तरफ, 8500 करोड़ रुपये बिना इस्तेमाल के पड़े हैं और दूसरी तरफ हम देखते हैं कि देश के बच्चे स्कूल तक अच्छी सड़क, स्कूल में अच्छी बेंच और पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं। तो, हम इन बच्चों के स्कूलों के लिए इस पैसे का इस्तेमाल क्यों नहीं कर रहे हैं?’’
उन्होंने कहा, ‘‘नए स्कूल बनाने के लिए इस पैसे का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है? अगर हम मान लें कि सभी सुविधाओं वाला एक अच्छा स्कूल बनाने की लागत लगभग आठ करोड़ रुपये है… तो 8,500 करोड़ रुपये में 1,000 से ज्यादा नए ‘हाई-टेक मॉडल’ स्कूल बनाए जा सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।’’
महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में स्कूलों के अपने हालिया दौरों पर, दीपके ने कहा कि विद्यालयों की हालत ‘‘बहुत खराब’’ है।
उन्होंने कहा, ‘‘जब मैंने अधिकारियों से पूछा कि यहां बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं हैं, तो मुझे बताया गया कि कोष की कमी है।’’
दीपके ने कहा, ‘‘एक तरफ तो कहा जा रहा है कि कोष नहीं है और दूसरी तरफ पीएम केयर्स फंड में 8,500 करोड़ रुपये पड़े हैं। तो क्या इस पैसे का इस्तेमाल स्कूलों के लिए नहीं किया जाना चाहिए?’’
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस पैसे का इस्तेमाल बच्चों की शिक्षा के लिए करने को कहें।
उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, प्रधानमंत्री से आग्रह है कि वह पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल लोगों के लिए, शिक्षा के लिए और गरीब बच्चों के स्कूलों के लिए करें, और प्रधानमंत्री को यह दिखाना चाहिए कि उन्हें सच में जनता की परवाह है।’’
भाषा शफीक संतोष
संतोष