पीएमके संस्थापक ने निष्कासित सदस्यों पर उन्हें राजनीति से बाहर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया

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पीएमके संस्थापक ने निष्कासित सदस्यों पर उन्हें राजनीति से बाहर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया

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  • Publish Date - February 13, 2026 / 01:52 PM IST,
    Updated On - February 13, 2026 / 01:52 PM IST

विलुप्पुरम (तमिलनाडु), 13 फरवरी (भाषा) पीएमके संस्थापक एस. रामदास ने आरोप लगाया है कि पार्टी से निष्कासित कुछ लोग दुष्प्रचार के जरिए उन्हें सक्रिय राजनीति से बाहर करने की कोशिश कर रहे हैं।

रामदास ने थैलापुरम स्थित अपने आवास पर बृहस्पतिवार को संवाददाताओं से बातचीत में दावा किया कि पार्टी से निष्कासित लोगों का यह गुट 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके नेतृत्व और पार्टी के हितों को कमजोर करने के लिए लगातार झूठ का सहारा ले रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग उन्हें और वरिष्ठ नेता जी.के. मणि के प्रति ‘‘अभद्र भाषा’’ का इस्तेमाल कर रहे हैं।

पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के संस्थापक ने पार्टी के ‘आम’ चुनाव चिह्न को लेकर निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने उनके अलग रह रहे पुत्र अनबुमणि रामदास के पते पर पत्र भेजा, जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि नेतृत्व से जुड़े विवाद का निस्तारण सक्षम न्यायालय में होना चाहिए।

पार्टी में आंतरिक मतभेद पिछले वर्ष उस समय और गहरा गया था जब अनबुमणि रामदास को कथित ‘‘पार्टी विरोधी गतिविधियों’’ के आरोप में प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया था। हालांकि प्रतिद्वंद्वी गुट का दावा है कि यह निष्कासन अमान्य है और निर्वाचन आयोग उनके पक्ष को ही वैध नेतृत्व के रूप में मान्यता देता है।

एस. रामदास ने कहा कि आगामी राज्य विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संभावित गठबंधनों पर चर्चा जारी है और अंतिम निर्णय शीघ्र सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वह पार्टी को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का डटकर मुकाबला करते रहेंगे।

उत्तर तमिलनाडु में प्रभाव रखने वाली पीएमके में जारी यह रस्साकशी फिलहाल कानूनी समीक्षा के दायरे में है, क्योंकि दोनों गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं।

भाषा

मनीषा सुभाष

सुभाष