अमेरिका-ईरान युद्ध पर प्रधानमंत्री की चुप्पी खतरनाक संकेत: सिसोदिया

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अमेरिका-ईरान युद्ध पर प्रधानमंत्री की चुप्पी खतरनाक संकेत: सिसोदिया

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  • Publish Date - March 5, 2026 / 06:27 PM IST,
    Updated On - March 5, 2026 / 06:27 PM IST

नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि वैश्विक तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका-ईरान युद्ध पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की “चुप्पी” एक “खतरनाक संकेत” देती है।

आम आदमी पार्टी (आप) के नेता सिसोदिया ने भारत के हितों और ऊर्जा सुरक्षा पर इस रुख के प्रभावों पर भी सवाल उठाए।

सिसोदिया ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आज एक भारतीय होने के नाते मन में कुछ बेहद गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ठीक एक महीने पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका के साथ एक व्यापार सौदा करते हैं। उस सौदे में अमेरिका की एक अहम शर्त मान ली जाती है कि भारत रूस से तेल आयात नहीं करेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल खुद पैदा नहीं करता। हम रोजाना इस्तेमाल होने वाले तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदते हैं। इसलिए किसी एक या दो स्रोत को बंद कर देना सिर्फ एक कूटनीतिक फैसला नहीं होता। यह सीधे इस बात से जुड़ा होता है कि देश में तेल की सप्लाई स्थिर रहेगी या नहीं, कीमतें नियंत्रित रहेंगी या नहीं, और संकट के समय देश के पास विकल्प बचेंगे या नहीं। इसी को ऊर्जा सुरक्षा कहा जाता है।’’

पश्चिम एशिया संकट के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में बुधवार को एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट से दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया।

सिसोदिया ने कहा, “कल अमेरिका ने इस युद्ध को लगभग भारत के दरवाजे तक ला खड़ा किया। 24 घंटे बीत गए, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री के मुंह से एक शब्द तक नहीं निकला। यह चुप्पी सिर्फ चुप्पी नहीं है। यह एक खतरनाक संकेत है।’’

उन्होंने सवाल किया, “इससे दुनिया को क्या संदेश जा रहा है? क्या कोई भी आकर भारत की सीमाओं के पास युद्ध छेड़ सकता है और भारत के प्रधानमंत्री चुप रहेंगे? आखिर यह चुप्पी किसके हित में है?”

भाषा खारी माधव

माधव