Bihar Politics News | Photo Credit: IBC24
नई दिल्ली: Bihar Politics News वो चेहरा, जिसने दो दशकों तक बिहार की तकदीर और तस्वीर लिखी। जिसने अपने फैसलों से कदम-कदम पर जनता को हैरान किया। फिर भी चुनावी सियासत का ये सिकंदर रहा अब राज्य की कमान किसी दूसरे को सौंपकर पटना से दिल्ली बढ़ चला है।
Bihar Politics News गुरुवार को पटना विधानसभा का नजारा बदला-बदला था। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब राज्यसभा कैंडिडेट के तौर पर पर्चा भरने पहुंचे, तो उनके साथ देश के गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। शाह ने नीतीश के सुशासन की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि नीतीश का कार्यकाल बिहार के इतिहास में ‘स्वर्णिम अक्षरों’ में लिखा जाएगा। शाह ने नीतीश को वो ‘क्लीन चिट’ भी दी, जिसका इंतजार शायद नीतीश को बरसों से था। शाह बोले- ‘इतने लंबे करियर में नीतीश के कुर्ते पर भ्रष्टाचार का एक दाग तक नहीं लगा।’
नामांकन से ठीक पहले नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर अपनी ‘दिल की बात’ साझा की। उन्होंने लिखा कि उनकी हमेशा से इच्छा थी कि वे संसद और विधानमंडल के चारों सदनों के सदस्य बनें। यानी नीतीश ने इसे अपनी ‘अंतिम इच्छा’ की पूर्ति बताया। साथ ही ये साफ कर दिया कि बिहार की नई सरकार को उनका पूरा सपोर्ट रहेगा।
लेकिन नीतीश की ये ‘इच्छा’ उनके समर्थकों पर बिजली बनकर गिरी। मुख्यमंत्री आवास के बाहर कार्यकर्ताओं का सब्र टूट गया। जेडीयू कार्यकर्ता फूट-फूट कर रोने लगे। नाराजगी इतनी थी कि कार्यकर्ताओं ने बीजेपी कोटे के मंत्री सुरेंद्र मेहता और अपनी ही पार्टी के विधायकों को वहां से खदेड़ दिया। समर्थकों का सीधा कहना है- ‘नीतीश के बिना बिहार अनाथ हो जाएगा।’
इधर, विपक्ष ने इसे बीजेपी की ‘बिसात’ करार दिया है। तेजस्वी यादव ने हमला बोलते हुए कहा कि बिहार में ‘महाराष्ट्र मॉडल’ लागू किया गया है और बीजेपी ने नीतीश कुमार को इतना टॉर्चर किया कि उन्हें इस्तीफा देकर राज्यसभा जाने पर मजबूर होना पड़ा। कांग्रेस ने भी इसे बिहार की जनता के साथ ‘बड़ा धोखा’ करार दिया है।
नीतीश कुमार अब दिल्ली जा रहे हैं, लेकिन पीछे छोड़ जा रहे हैं कई अनुत्तरित सवाल क्या बिहार में अब बीजेपी का पूर्ण वर्चस्व होगा? कौन होगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री? और क्या नीतीश दिल्ली की राजनीति में भी वही ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा पाएंगे? बिहार की राजनीति अब एक नए मोड़ पर खड़ी है।