पोषण अभियान को उसी स्तर पर वापस लाये जाने की जरूरत है जो कोविड-19 से पहले था: यूनिसेफ

पोषण अभियान को उसी स्तर पर वापस लाये जाने की जरूरत है जो कोविड-19 से पहले था: यूनिसेफ

पोषण अभियान को उसी स्तर पर वापस लाये जाने की जरूरत है जो कोविड-19 से पहले था: यूनिसेफ
Modified Date: November 29, 2022 / 08:58 pm IST
Published Date: October 4, 2020 11:46 am IST

(उज्मी अतहर)

नयी दिल्ली, चार अक्टूबर (भाषा) संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) भारत (पोषण) के प्रमुख अर्जन डे वाग्ट ने कहा है कि राष्ट्रीय पोषण मिशन को, कोरोना वायरस महामारी से पहले के स्तर पर वापस लाने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि पोषण अभियान के तहत कार्यक्रम जैसे कि समेकित बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) का कार्यान्वयन, घर पर राशन ले जाना और खून की कमी (एनीमिया) को रोकने के लिए गर्भवती महिलाओं और बच्चों को आयरन फोलिक टैबलेट देना आदि, पूरी तरह से फिर से लागू करने की आवश्यकता है।

वाग्ट ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमें पोषण अभियान उसी स्तर पर वापस लाने की जरूरत है जहां हम जनवरी (कोविड समय से पहले) में थे। इसे किसी अलग कवायद की आवश्यकता नहीं है। हमें समान कार्यक्रमों की आवश्यकता है …आईसीडीएस के कार्यान्वयन, घर पर राशन ले जाना और एनीमिया को रोकने के लिए गर्भवती महिलाओं और बच्चों को आयरन फोलिक टैबलेट देना पूरी तरह से फिर से लागू करने की आवश्यकता है।’’

उन्होंने कहा कि पहले से किये जा रहे कार्यों को ही फिर से शुरू किये जाने की जरूरत है न कि किसी नये कार्य की।

वाग्ट के अनुसार कई मामलों में, महामारी के कारण पोषण से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के वैकल्पिक तरीकों को समायोजित करने और देखने की जरूरत है।

उन्होंने कहा, ‘‘कई मामलों में, हमें समायोजित करने की आवश्यकता है। उदाहरण के लिए, चूंकि स्कूल बंद हैं, बच्चों को वह भोजन प्राप्त करने की आवश्यकता है जो वे स्कूलों में प्राप्त करते थे। इसलिए, हमें अन्य तरीकों की तलाश करने की आवश्यकता है जैसे कि घर-घर राशन ले जाना।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हर घर पर जाने की जरूरत है । आयरन फोलिक टैबलेट, जो स्कूलों में किशोर लड़कियों को वितरित की जाती हैं, उन लोगों को दी जा सकती है जिन्हें समुदायों के माध्यम से इसकी आवश्यकता होती है।’’

वाग्ट ने कहा कि भारत में कोरोना वायरस, पोषण को तीन तरीकों से प्रभावित करता है। पहला रोजगार खोने वाले लोगों के साथ गरीबी बढ़ रही है। गरीबी से खाद्य असुरक्षा होती है। दूसरा यह है कि सेवाओं को कैसे प्रभावित किया गया और तीसरा यह है कि पोषण पर ध्यान देने के मामले में इस समय नेतृत्व कैसे प्रभावित हुआ।

उन्होंने कहा कि पूर्व में , पोषण पखवाड़ा और पोषण माह, समुदायों में बड़ी संख्या में लोगों को एक साथ लाने के लिए एक महत्वपूर्ण घटक था, लोगों को अच्छे पोषण के बारे में शिक्षित करने के लिए सामूहिक कार्यक्रम होते थे लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पिछले चार

सप्ताह से इस तरह के कार्यक्रम नहीं देखने को मिले है।

उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए घरों में जाने और घरों में जाकर परामर्श देने की जरूरत है।’’

केन्द्र ने 2018 में पोषण अभियान की शुरूआत की थी। इस मिशन के तहत प्रत्येक सितम्बर को पोषण माह के रूप में मनाया जाता है।

उन्होंने कहा, ‘‘लॉकडाउन के दौरान यह प्रयास किये गये कि भोजन बच्चों के दरवाजे तक ले जाया जा सके। लेकिन मुझे यकीन नहीं है कि यह कितना प्रभावी रहा है।’’

भाषा

देवेंद्र नरेश

नरेश


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