‘मंत्री प्रधान असंवेदनशील, अक्षम और आदतन झूठ बोलने वाले हैं’: कांग्रेस
‘मंत्री प्रधान असंवेदनशील, अक्षम और आदतन झूठ बोलने वाले हैं’: कांग्रेस
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) कांग्रेस ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा राहुल गांधी की आलोचना किए जाने पर पलटवार करते हुए बुधवार को कहा कि भाजपा (भारतीय जनता पार्टी के) नेता ‘‘असंवेदनशील, अक्षम और आदतन झूठ बोलने वाले’’ हैं।
पार्टी ने यह भी कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में मंत्री प्रधान के बेहद खराब कार्यकाल का पूरा हिसाब जल्द देश के सामने रखा जाएगा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि ऐसे समय में, जब उन्होंने करोड़ों छात्रों की आकांक्षाओं को गहरा आघात पहुंचाया है, वह इस्तीफा देने से इनकार कर रहे हैं और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपना ‘‘बेलगाम अहंकार और ओछापन’’ लगातार प्रदर्शित कर रहे हैं।
रमेश की यह टिप्पणी प्रधान के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने मंगलवार को कहा था कि सरकार राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने और संसद में युवाओं की हर जायज चिंता का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास के बाहर धरना देने के लिए गांधी की आलोचना की और उन पर संसद के मानसून सत्र के दौरान व्यवधान पैदा करने के लिए छात्रों को ‘‘राजनीतिक हथियार’’ के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
प्रधान पर पलटवार करते हुए रमेश ने कहा, ‘‘मंत्री प्रधान, प्रधानमंत्री की तरह ही उदासीन, असंवेदनशील, अयोग्य और आदतन झूठ बोलने वाले व्यक्ति हैं। ऐसे समय में, जब उन्होंने करोड़ों छात्रों की आकांक्षाओं को गहरा आघात पहुंचाया है, वह इस्तीफा देने से इनकार कर रहे हैं और इसके बजाय सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपना बेलगाम अहंकार और ओछापन लगातार प्रदर्शित कर रहे हैं।’’
रमेश ने कहा कि सच्चाई यह है कि उनके इस्तीफे की मांग किसी एक मुद्दे पर आधारित नहीं है, बल्कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान लगातार सामने आई विफलताओं और भ्रष्टाचार के पूरे सिलसिले पर आधारित है।
भ्रष्टाचार के उदाहरणों का जिक्र करते हुए रमेश ने कहा कि प्रधान के कार्यकाल में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) लगातार विफल हुई है जिसमें 2024 में कई बार प्रश्नपत्र लीक और रद्द होने की घटनाएं तथा 2026 में नीट-यूजी (स्नातक) और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) समाजशास्त्र का प्रश्नपत्र लीक होना शामिल है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘मंत्री की प्रतिक्रिया अहंकार और ओछी राजनीति से भरी रही है। उन्होंने किसी भी प्रश्नपत्र लीक के मामले से आधिकारिक तौर पर इनकार किया और एनटीए को मजबूत बनाने के लिए संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति की सिफारिशों को केवल इसलिए स्वीकार करने से इनकार कर दिया क्योंकि उस समिति में विपक्ष के सदस्य भी शामिल हैं।’’
रमेश ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ‘ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम’ (ओएसएम) की खरीद में भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया।
रमेश ने दावा किया कि जिस कंपनी के विफल होने का लंबा रिकॉर्ड रहा है, उसे सीबीएसई द्वारा निविदा में बदलाव करने के बाद तीन बार ठेका दिया गया, जिससे ‘सीओईएमपीटी’ कंपनी को लाभ मिला।
उन्होंने कहा, ‘‘इस घोटाले का खुलासा किसी जांच एजेंसी ने नहीं, बल्कि सीबीएसई के 18 वर्षीय एक छात्र ने किया। सरकार ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग का गठन किया, लेकिन आयोग को एक महीने में रिपोर्ट देने की समयसीमा बीत जाने के बाद भी अब तक यह नहीं बताया गया कि उसकी जांच में क्या सामने आया।’’
रमेश ने कहा कि कुलपतियों की नियुक्ति केवल उनकी राजनीतिक निष्ठा के आधार पर की जाती है और मंत्रालय की ओर से उन्हें भ्रष्टाचार करने की मौन छूट दी जाती है।
उन्होंने कहा कि देश के कई प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों – काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) और इलाहाबाद विश्वविद्यालय (एयू) के छात्रों एवं शिक्षकों ने अपने संस्थानों के नेतृत्व पर भ्रष्टाचार और तानाशाही रवैये के विश्वसनीय आरोप लगाए हैं।
रमेश ने आरोप लगाया कि ऐसी भी खबरें हैं कि शिक्षकों की नियुक्तियां सबसे ऊंची बोली लगाने वालों को बेची जा रही हैं, जिसकी शुरुआती कीमत 30 लाख रुपये है।
उन्होंन कहा कि कम-से-कम दो केंद्रीय विश्वविद्यालय – शिलांग का पूर्वोत्तर पर्वतीय विश्वविद्यालय और असम का तेजपुर विश्वविद्यालय, अपने कुलपतियों के खिलाफ इतने जोरदार विरोध प्रदर्शनों के गवाह बने कि उन्हें परिसर छोड़कर दूर से काम करना पड़ा।
रमेश ने कहा कि ये सभी वे लोग हैं, जिन्हें ‘‘मंत्री प्रधान और प्रधानमंत्री’’ ने भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने के लिए स्वयं चुना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्रालय के अन्य स्वायत्त निकायों और संस्थानों में भी व्यापक भ्रष्टाचार है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद में रिश्वतखोरी का घोटाला सामने आया, जिसके बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने जेएनयू के एक प्रोफेसर के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। उन्होंने कहा कि इस प्रोफेसर की नियुक्ति पहले इस सरकार के पसंदीदा कुलपति ने की थी और बाद में उसी कुलपति ने उन्हें परिषद में भी नियुक्त किया।
रमेश ने कहा कि सीबीआई ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के कुलाधिपति के खिलाफ भी भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए आरोपपत्र दाखिल किया है। इन्हें पहले मोदी सरकार ने यूजीसी का अध्यक्ष नियुक्त किया था।
उन्होंने कहा कि भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) भी वित्तीय अनियमितताओं की खबरों में घिरी रही है।
रमेश ने कहा कि यह तो पूरी तस्वीर का केवल एक छोटा-सा हिस्सा है।
भाषा सुरभि सिम्मी
सिम्मी

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