प्रशांत किशोर उन नेताओं और पार्टियों से जुड़ते हैं जिनमें उन्हें ‘संभावना’ दिखाई देती है: प्रदीप

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प्रशांत किशोर उन नेताओं और पार्टियों से जुड़ते हैं जिनमें उन्हें ‘संभावना’ दिखाई देती है: प्रदीप

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  • Publish Date - May 21, 2026 / 03:39 PM IST,
    Updated On - May 21, 2026 / 03:39 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) चुनाव विश्लेषक प्रदीप गुप्ता ने कहा है कि चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर और उनकी टीम उन नेताओं और पार्टियों से जुड़ते हैं जिनमें उन्हें ‘संभावना’ दिखाई देती है। उनका तर्क है कि इस तरह के राजनीतिक आकलन उभरते रुझानों की समझ पर आधारित होते हैं।

बुधवार को ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए गए एक साक्षात्कार में ‘एक्सिस माई इंडिया’ के कर्ताधर्ता गुप्ता ने कहा कि किशोर किसी के साथ काम करने का निर्णय लेने से पहले राजनीतिक घटनाक्रम का गहन अध्ययन करते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रशांत किशोर या आई-पैक (आईपीएसी) का काम जमीनी हकीकत का गहराई से अध्ययन करना है। अगर उन्हें किसी नेता या पार्टी में संभावना दिखाई देती है, तो वे पेशेवर तौर पर उनके साथ जुड़ जाते हैं।’’

गुप्ता ने किशोर द्वारा 2025 की शुरुआत में जताए गए उस अनुमान का जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि अभिनेता-राजनेता विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। गुप्ता ने कहा कि यह आकलन महज एक ‘तुक्का’ नहीं था।

उन्होंने बताया कि किशोर को लगभग पांच साल पहले द्रमुक प्रमुख एम.के. स्टालिन ने नियुक्त किया था और उनके सलाहकार के रूप में काम करते हुए उन्होंने राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रखी थी।

गुप्ता ने कहा कि उस समय तमिलनाडु में काफी राजनीतिक अवसर उत्पन्न हो रहे थे, क्योंकि अन्नाद्रमुक ने दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता के नेतृत्व में 2011 और 2016 में लगातार विधानसभा चुनाव जीते थे।

गुप्ता ने कहा, ‘‘चूंकि उनके (किशोर के) लोग पहले से ही वहां मौजूद थे, इसलिए वे देख सकते थे कि एक नेता (विजय) उभर रहा है। यही कारण है कि वे ऐसा अनुमान जता सके।’’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक पूर्वानुमान की विश्वसनीयता उनके पीछे मौजूद सूचना नेटवर्क की गुणवत्ता और गहराई पर निर्भर करती है।

गुप्ता ने कहा, ‘‘मैं यह कहना चाहता हूं कि सूचना के स्रोत, उसकी गहराई और पूर्वानुमान के पीछे की समझ के स्तर की जांच करना जरूरी है। ये कारक तय करते हैं कि कोई पूर्वानुमान अंततः सच होगा या नहीं।’’

भाषा

संतोष नरेश

नरेश