Premanand Maharaj Video: ‘मैं शराब पीता हूं’, कक्षा 9वीं की छात्र की बात सुन हैरान रह गए प्रेमानंद महाराज, बताया सुधारने का तरीका, जानें आप भी..

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Premanand Maharaj Video: 'मैं शराब पीता हूं', कक्षा 9वीं की छात्र की बात सुन हैरान रह गए प्रेमानंद महाराज, बताया सुधारने का तरीका, जानें आप भी..

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  • Publish Date - June 16, 2026 / 12:20 PM IST,
    Updated On - June 16, 2026 / 12:20 PM IST

Premanand Maharaj Video | Photo Credit: AI

HIGHLIGHTS
  • प्रेमानंद महाराज ने बच्चों सुधारने का तरीका बताया
  • कहा- अच्छी-बुरी संगति जीवन की दिशा तय करती है।
  • प्रेम और विश्वास से बच्चे बुरी आदतें छोड़ सकते हैं।

नई दिल्ली: Premanand Maharaj Video वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) अपने प्रवचनों को लेकर पूरे देश में पहचान बना चुके हैं। अपने प्रवचनों के माध्यम से वो लोगों को जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण सीख देते रहते हैं। खासतौर पर बच्चों की परवरिश और उन्हें अच्छे संस्कार देने के विषय पर उनके विचार लोगों को काफी प्रभावित करते हैं। इसी क्रम में हाल ही में उन्होंनें बच्चों में बढ़ती गलत आदतों और नशे की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए इससे छुटकारा पाने का तरीका बताया है।

Premanand Maharaj Latest Video प्रेमानंद महाराज (Premanand Maharaj) ने कहा कि आज कई बच्चे नशे और अनुचित आचरण की चपेट में आ रहे हैं। उनका मानना है कि उन्हें इस रास्ते से निकालकर सही दिशा देने का केवल एक ही प्रभावी तरीका है, जो उन्हें सुधार सकता है।

दरअसल, एक सत्संग के दौरान एक बच्चे ने प्रेमानंद महाराज के पास अपनी आदत बताई, छात्र ने बताया कि वो 9वीं कक्षा का छात्र है और इस उम्र में वो शराब पीने की आदत का शिकार हो चुका है। बच्चे की इस आदत को सुनकर प्रेमानंद महाराज ने उन्हें प्यार से समझाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि आज के समय में कई बच्चे गलत संगति, सोशल मीडिया के प्रभाव और परिवार से पर्याप्त संवाद न होने के कारण भटक जाते हैं।

बच्चों को डांटने से नहीं, समझाने से होगा सुधार

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि किसी भी बच्चे को सुधारने का सबसे अच्छा तरीका प्रेम और संवाद है। यदि माता-पिता या शिक्षक केवल डांट-फटकार का सहारा लेते हैं, तो बच्चे और अधिक जिद्दी हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों के मन को समझना जरूरी है। जब परिवार बच्चे के साथ समय बिताता है, उसकी समस्याएं सुनता है और उसे सही-गलत का अंतर समझाता है, तब उसके भीतर सकारात्मक बदलाव आने की संभावना बढ़ जाती है.

संगति का बच्चों के जीवन पर गहरा प्रभाव

प्रेमानंद महाराज ने आगे कहा कि अच्छी और बुरी संगति व्यक्ति के जीवन की दिशा तय करती है। किशोरावस्था में बच्चे सबसे अधिक अपने दोस्तों और आसपास के माहौल से प्रभावित होते हैं। यदि वे गलते आदतों वाले लोगों के संपर्क में आते हैं, तो नशा अनुशानहीनता और अन्य बुरी आदतों की ओर आकर्षित हो सकते हैं। इसलिए माता-पिता को बच्चों के मित्रों और उनकी दिनचर्या पर ध्यान देना चाहिए।

आध्यात्मिक और नैतिक शिक्षा की जरूरत

उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल स्कूल की शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है। उन्हें नैतिक मूल्यों, संस्कारों और आत्मअनुशासन की शिक्षा भी मिलनी चाहिए। जब बच्चे जीवन के उद्देश्य, अच्छे व्यवहार और जिम्मेदारियों को समझते हैं, तो वे गलत रास्तों से दूर रहने का प्रयास करते हैं। आध्यात्मिक गतिविधियां और सकारात्मक वातावरण भी उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण

प्रेमानंद महाराज ने अंत में कहा कि बच्चों के सुधार की शुरुआत घर से होती है। यदि परिवार प्रेम, विश्वास और अच्छे संस्कारों का वातावरण बनाए रखे, तो बच्चे बड़ी से बड़ी बुरी आदत छोड़ सकते हैं। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करें, ताकि वे अपनी समस्याएं खुलकर साझा कर सकें। उनका मानना है कि स्नेह, मार्गदर्शन और सही संगति ही बच्चों को बेहतर भविष्य की ओर ले जाने का सबसे प्रभावी तरीका है।

इन्हें भी पढ़ें:-

प्रेमानंद महाराज ने बच्चों के सुधार का क्या तरीका बताया?

प्रेम और संवाद से बच्चों को सही दिशा देना।

बच्चों में गलत आदतें क्यों बढ़ रही हैं?

गलत संगति, सोशल मीडिया का प्रभाव और परिवार से संवाद की कमी।

संगति का बच्चों पर क्या असर होता है?

किशोरावस्था में बच्चे दोस्तों और माहौल से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।