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रायरंगपुर/पुरी, चार फरवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को पुरी में ‘पिंडदान’ किया और मयूरभंज जिले में अपने गृह नगर रायरंगपुर में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया।
मुर्मू (67) ने पुरी में जगन्नाथ मंदिर में दर्शन किए और रायरंगपुर में एक स्कूल तथा एक धार्मिक स्थल का भी दौरा किया।
मुर्मू ने दिन की शुरुआत पुरी में श्वेता गंगा सरोवर में ‘पिंडदान’ कर अपने पूर्वजों के “मोक्ष” की कामना के साथ की। इसके बाद उन्होंने 12वीं सदी के मंदिर में भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के समक्ष शीश झुकाया और मंदिर में ध्वज फहराने के लिए ‘दक्षिणा’ भी अर्पित की।
मंदिर से लौटते समय देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति मुर्मू ने प्रोटोकॉल का पालन किए बिना सड़क पर पैदल चलकर दोनों ओर खड़े लोगों से मुलाकात की। उन्होंने बच्चों को चॉकलेट दी और बुजुर्गों को ‘नमस्ते’ कहते हुए अभिवादन किया।
इसके बाद वह रायरंगपुर पहुंचीं, जहां उन्होंने यात्रियों के लिए एक ‘हॉलिडे होम’ का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा, “पहले रायरंगपुर आने वाले लोगों के ठहरने के लिए उचित व्यवस्था नहीं होती थी। अब यह हॉलिडे होम इस समस्या का समाधान करेगा।”
राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी समेत विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में एक जनसभा में राष्ट्रपति ने महाराजा श्रीराम चंद्र भंज देव विश्वविद्यालय के सूचना प्रौद्योगिकी परिसर का उद्घाटन किया और आयुष अस्पताल व आयुर्वेदिक कॉलेज तथा ओडिशा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर की आधारशिला रखी।
इसके अलावा उन्होंने रायरंगपुर में तीरंदाजी केंद्र, शहर सौंदर्यीकरण एवं जल निकासी उन्नयन परियोजनाओं, सभागार एवं सांस्कृतिक केंद्र, बालिका छात्रावास और नशामुक्ति केंद्र की आधारशिला भी रखी।
राष्ट्रपति ने ओडिशा के पहले आदिवासी मंत्री भांजबीरा सुनाराम सोरेन की प्रतिमा का अनावरण किया।
उन्होंने कहा, “आज ओडिशा के आदिवासियों का जो भी विकास हो रहा है, उसमें सुनाराम सोरेन का बड़ा योगदान है।”
मुर्मू ने महुलडीहा में स्थित एक सरकारी बालिका उच्च विद्यालय का दौरा किया और छात्राओं से संवाद किया। उन्होंने छात्राओं से कहा, “जीवन में त्याग करना सीखो। जो तुम खोते हो, वह कई गुना होकर लौटता है।” उन्होंने छात्राओं से उनके सर्वांगीण विकास से जुड़ी अपेक्षाओं के बारे में भी पूछा।
विद्यालय में खेल मैदान की सुविधा न होने की जानकारी मिलने पर राष्ट्रपति ने ओडिशा सरकार से बालिकाओं के लिए खेल मैदान की व्यवस्था करने को कहा।
राष्ट्रपति ने पुण्येश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और मंदिर परिसर की सफाई भी की। पुजारी ने बताया कि यह धार्मिक परंपरा वह राष्ट्रपति बनने से पहले भी निभाती रही हैं।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि ओडिशा और मयूरभंज जिले को केंद्र सरकार के ‘पूर्वोदय’ विजन से लाभ मिला है।
उन्होंने विश्वास जताया कि ये विकास परियोजनाएं, संस्थान और योजनाएं क्षेत्र के लोगों के लिए लाभकारी साबित होंगी और रोजगार के नए अवसर सृजित करेंगी।
जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ को देखकर भावुक हुईं राष्ट्रपति ने कहा, “मैं जो कुछ भी हूं, वह आपके आशीर्वाद और शुभकामनाओं की वजह से हूं। किसी भी पद पर रहूं या न रहूं, जीवन के अंतिम क्षण तक लोगों के कल्याण के लिए काम करती रहूंगी।”
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार 90 से अधिक लघु वनोपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य और विभिन्न योजनाओं के तहत ऋण उपलब्ध कराकर आदिवासी समुदाय के आर्थिक विकास के लिए विशेष प्रयास कर रही है।
राष्ट्रपति ने बताया कि स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने पर भी काम हो रहा है तथा पीवीटीजी समुदायों के कल्याण के लिए प्रधानमंत्री-जनमन योजना लागू की गई है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विद्युतीकरण किया गया है और दूरदराज के इलाकों में 4जी इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई है।
राष्ट्रपति ने कहा, “सबसे गरीब व्यक्ति के उत्थान का लक्ष्य आदिवासी समाज के विकास से ही हासिल किया जा सकता है। सरकार लगातार यह सुनिश्चित कर रही है कि आदिवासी समुदायों को सभी कल्याणकारी और विकास योजनाओं का लाभ मिले।”
उन्होंने लोगों से इन योजनाओं का लाभ उठाने और दूसरों को भी जागरूक करने का आग्रह किया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सरकार और नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से ही पूरा किया जा सकता है।
भाषा जोहेब संतोष
संतोष