नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य और उसके आसपास अवैध रेत खनन में मदद करने वालों के खिलाफ एहतियाती हिरासत के आदेश जारी किए जाने चाहिए, क्योंकि ऐसे लोग प्राकृतिक संसाधनों को खत्म कर रहे हैं और वे किसी भी सहानुभूति के हकदार नहीं हैं।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने की, जो ‘राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और संकटग्रस्त जलीय वन्यजीवों पर खतरा’ को लेकर स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी।
पीठ को बताया गया कि मध्यप्रदेश के मुरैना में 551 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जो अवैध रेत खनन गतिविधियों में मदद करते हैं।
इसने कहा, ‘‘आप उन्हें हिरासत में क्यों नहीं लेते? ये वे लोग हैं, जिनके खिलाफ एहतियाती हिरासत के आदेश जारी किए जाने चाहिए।’’
पीठ ने कहा कि इनमें से कुछ लोगों को उदाहरण पेश करने के लिए कुछ समय के लिए एहतियाती हिरासत में रखा जाना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘ये लोग प्राकृतिक संसाधनों को खत्म कर रहे हैं और साफ-सुथरे वन क्षेत्रों को नष्ट कर रहे हैं। वे किसी भी सहानुभूति के हकदार नहीं हैं।’’ न्यायालय ने कहा कि एहतियाती हिरासत के आदेश एक निवारक के रूप में काम कर सकते हैं।
राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, जिसे राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है, 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला तीन राज्यों का संरक्षित क्षेत्र है। लुप्तप्राय घड़ियाल के अलावा यह लाल रंग के कछुए और लुप्तप्राय डॉल्फिन का भी घर है।
राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की साझी सीमा के पास चंबल नदी पर स्थित इस अभयारण्य को सबसे पहले 1978 में मध्य प्रदेश में संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था और अब यह एक लंबा और संकरा संरक्षित क्षेत्र है, जिसका प्रबंधन तीनों राज्य मिलकर करते हैं।
सुनवाई के दौरान, पीठ ने वन सुरक्षाकर्मी सहित अग्रिम पंक्ति के उन वनकर्मियों के कल्याण के लिए एक संस्थागत और संरचित योजना की आवश्यकता पर जोर दिया, जो कानून लागू करने में जुटे हुए हैं।
पीठ को बताया गया कि पूर्व में कुछ ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें ड्यूटी के दौरान वन सुरक्षाकर्मी पर हमला किया गया या उनकी हत्या कर दी गई।
तीनों राज्यों में से एक राज्य की ओर से पेश एक विधि अधिकारी ने कहा कि पहले मौत के मामले में 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता था और अब इसे बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दिया गया है।
पीठ मामले की अगली सुनवाई चार अगस्त को करेगी।
भाषा संतोष सुरेश
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