वैश्विक उछाल के बीच भारत में कीमतों में बढ़ोतरी केवल तीन प्रतिशत तक सीमित रही : भाजपा

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वैश्विक उछाल के बीच भारत में कीमतों में बढ़ोतरी केवल तीन प्रतिशत तक सीमित रही : भाजपा

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  • Publish Date - May 15, 2026 / 03:26 PM IST,
    Updated On - May 15, 2026 / 03:26 PM IST

नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का बचाव करते हुए शुक्रवार को दावा किया कि भारत ने वैश्विक तेल संकट के बावजूद दो महीने से अधिक समय तक नागरिकों को इसके असर से बचाए रखा और केवल ‘‘सीमित तथा संतुलित’’ मूल्य वृद्धि लागू की, जबकि कई देशों में कीमतों में भारी उछाल देखा गया है।

यह बयान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद आया है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण तेल विपणन कंपनियों को बढ़ते घाटे का सामना करना पड़ रहा था। चार वर्षों से अधिक समय बाद ईंधन की कीमतों में यह पहली बढ़ोतरी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में ईंधन की खपत कम करने के लिए मेट्रो सेवाओं का उपयोग, कारपूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों और ‘‘वर्क फ्रॉम होम’’ जैसी व्यवस्थाओं को अपनाने का सुझाव दिया था, ताकि पश्चिम एशिया संकट के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखा जा सके।

भारतीय जनता पार्टी के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत में सबसे कम बढ़ोतरी दर्ज की गई, जहां पेट्रोल की कीमतों में 3.2 प्रतिशत और डीजल में 3.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

उन्होंने कहा, ‘‘15 मई को घोषित तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी वास्तव में लगभग चार वर्षों में पहली ईंधन मूल्य वृद्धि है और लगभग 95 रुपये प्रति लीटर के बेस प्राइस पर यह केवल करीब 3.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी बनती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पूरे परिदृश्य में भारत एक अलग और उल्लेखनीय अपवाद बनकर उभरा। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम वृद्धि भारत में दर्ज की गई।’’

भाजपा नेता ने दावा किया कि भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने पश्चिम एशिया संकट गहराने के बाद 76 दिनों तक कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों का बड़ा भार खुद वहन किया। इन कंपनियों की खुदरा ईंधन बाजार में लगभग 90 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।

उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया संकट गहराने के बाद 76 दिनों तक भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का पूरा बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला। उन्होंने लागत का बड़ा हिस्सा खुद वहन किया।’’

विभिन्न खबरों का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि दैनिक ‘अंडर-रिकवरी’ (किसी वस्तु को बेचने में जितनी लागत आती है, उससे कम कीमत पर बेचने के कारण होने वाला घाटा या नुकसान) लगभग एक हजार करोड़ रुपये प्रतिदिन तक पहुंच गई थी।

उन्होंने कहा, ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान और तेल आपूर्ति प्रभावित होने के कारण अप्रैल और मई के अधिकांश समय ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा। इसका असर दुनिया की लगभग हर बड़ी अर्थव्यवस्था के पेट्रोल पंपों पर साफ दिखाई दिया।’’

उन्होंने दावा किया कि इस वर्ष 23 फरवरी से 15 मई के बीच मलेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका सहित कई देशों में ईंधन कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई।

मालवीय ने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि पाकिस्तान में लोग तीन महीने पहले की तुलना में ईंधन के लिए लगभग 55 प्रतिशत अधिक भुगतान कर रहे हैं, जबकि मलेशिया में कीमतें 56 प्रतिशत से अधिक बढ़ीं। अमेरिका में कीमतों में करीब 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

उन्होंने कहा, ‘‘कई देशों में डीजल की कीमतों में 50 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि डीजल सीधे माल ढुलाई, व्यापार और लॉजिस्टिक्स को प्रभावित करता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘केवल सऊदी अरब में प्रत्यक्ष सब्सिडी व्यवस्था के कारण कोई वृद्धि नहीं हुई। लेकिन प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत वह देश रहा, जहां आम नागरिकों पर सबसे कम बोझ डाला गया।’’

उन्होंने कहा कि ईंधन मूल्य नियंत्रण का सीधा असर महंगाई पर पड़ता है, क्योंकि यह परिवहन, खाद्य कीमतों, लॉजिस्टिक्स, निर्माण लागत और घरेलू बजट को प्रभावित करता है।

मालवीय ने कहा, ‘‘असल कहानी यह है कि जहां दुनिया के अधिकांश देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 10 प्रतिशत, 20 प्रतिशत, 50 प्रतिशत और कुछ मामलों में 90 प्रतिशत तक बढ़ीं, वहीं भारत ने इस बढ़ोतरी को लगभग तीन प्रतिशत तक सीमित रखा।’’

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी वैश्विक ऊर्जा संकट के समय कांग्रेस पर ‘‘राजनीतिक अवसरवाद’’ का आरोप लगाया।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भारत में ईंधन कीमतों में केवल लगभग तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि वैश्विक औसत वृद्धि 20 प्रतिशत से अधिक रही है।”

उन्होंने कहा, ‘‘140 करोड़ भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक राष्ट्रवाद के साथ खड़े हैं।’’

भाषा गोला अविनाश

अविनाश