नयी दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने मंगलवार को कहा कि ऋषिकेश के तपोवन स्थित मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) का संचालन करने वाली निजी कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद कमियों को दूर न करने पर कंपनी का अनुबंध रद्द कर दिया गया है और उसे काली सूची में भी डाल दिया गया है।
यह कार्रवाई हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए उन वीडियो के बाद की गई, जिनमें आरोप लगाया गया था कि 3.5 एमएलडी क्षमता वाले तपोवन एसटीपी से अत्यंत गंदा पानी गंगा नदी में छोड़ा जा रहा है।
एनएमसीजी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘आपने मुद्दा उठाया, हमने उसे ठीक किया। यही संवाद निर्मल गंगा की सबसे बड़ी गारंटी है। जहां भी कोई चूक होगी, वहीं जवाबदेही तय की जाएगी। मां गंगा के प्रति हमारा यह संकल्प अडिग है।’’
मिशन ने बताया कि वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित कंपनी का अनुबंध समाप्त कर दिया गया और अब युद्धस्तर पर सुधार कार्य चल रहा है।
उसने कहा कि मंगलवार से तपोवन एसटीपी का उपचारित जल निर्धारित मानकों के अनुरूप दोबारा गंगा में छोड़ा जा रहा है।
एनएमसीजी ने सतर्क नागरिकों का धन्यवाद करते हुए कहा, ‘‘मां गंगा की पवित्रता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की साझा विरासत और जिम्मेदारी है। जब समाज की निगरानी इतनी सजग होती है, तो व्यवस्था भी अधिक जवाबदेह बनती है। आपकी सतर्कता ही हमारी ताकत है।’’
मिशन ने स्पष्ट किया कि यह एसटीपी वर्षों से निर्धारित मानकों के अनुसार सीवेज का उपचार करता रहा है। समस्या संयंत्र में नहीं, बल्कि उसके संचालन की जिम्मेदारी निभा रही कंपनी में थी।
एनएमसीजी के अनुसार, फरवरी 2026 में राज्य स्वच्छ गंगा मिशन के अधिकारियों ने औचक निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं पायी थीं। इसके बाद कंपनी को 12 से अधिक नोटिस जारी किए गए, 6.16 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया और सभी उपकरणों को चालू करने के लिए 30 दिन का समय दिया गया। जब कंपनी ने सुधार नहीं किया तो दो जुलाई 2026 को उसका अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया, उसे दो वर्षों के लिए काली सूची में डाल दिया गया और उसकी सुरक्षा जमा राशि भी जब्त कर ली गई।
एनएमसीजी ने पिछले सप्ताह वायरल हुए उन वीडियो पर भी स्थिति स्पष्ट की, जिनमें एसटीपी के पास गाद मिला पानी बहता दिखाई दे रहा था।
मिशन ने बताया कि तीन जुलाई को जब ये वीडियो सामने आए, उस समय परिसर में सफाई का काम चल रहा था। तत्काल निर्देश देकर गाद हटाने और नियमानुसार उसका निपटान सुनिश्चित कराया गया।
भाषा गोला सुरेश
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