कोच्चि, आठ जनवरी (भाषा) वर्ष 2017 में एक अभिनेत्री के यौन उत्पीड़न के मामले में अभियोजन पक्ष ने मलयालम फिल्मों के अभिनेता दिलीप और तीन अन्य लोगों को बरी करने के अधीनस्थ न्यायालय के फैसले को गलत करार दिया।
एर्नाकुलम जिला प्रधान सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील दायर करने के लिए अभियोजन महानिदेशक को सौंपी गई रिपोर्ट में दिलीप सहित आरोपियों को बरी किए जाने और छह दोषियों को दी गई सजा की कड़ी आलोचना की गई है।
यह रिपोर्ट विशेष लोक अभियोजक वी. अजा कुमार ने सौंपी है।
रिपोर्ट में बताया गया, “अधीनस्थ न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपी एक से सात और आरोपी सात, आठ, नौ और 15 के खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों का मूल्यांकन करते समय, विशेष रूप से आरोपी आठ और 15 के संबंध में, साक्ष्यों के मूल्यांकन में दोहरे मापदंड अपनाए।”
आरोपी संख्या आठ दिलीप और आरोपी संख्या 15 उनके दोस्त शरद जी नायर हैं।
अभियोजन पक्ष ने रिपोर्ट में बताया कि प्रस्तुत साक्ष्यों का मूल्यांकन अत्यंत अनुचित, गैर-न्यायसंगत और पक्षपातपूर्ण तरीके से किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, “अधिकांश महत्वपूर्ण साक्ष्यों को या तो अनदेखा कर दिया गया या बिना किसी वैध कारण के खारिज कर दिया गया।”
अभियोजन पक्ष के अनुसार, प्रस्तुत साक्ष्यों को खारिज करने के लिए अधीनस्थ न्यायालय द्वारा दिए गए कारण निराधार और गैर-न्यायसंगत हैं।
अभियोजन पक्ष ने बताया कि दोषी ठहराए गए छह व्यक्तियों को केवल 20 वर्ष की कारावास की सजा सुनाई गई, जबकि अधिकतम सजा आजीवन कारावास है।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि 1,709 पृष्ठों का यह फैसला किसी के लिए भी पढ़ना और समझना बेहद मुश्किल है।
रिपोर्ट के मुताबिक, “फैसला अनावश्यक रूप से लंबा है और अप्रासंगिक मामलों पर चर्चा व मुकदमे की सुनवाई के दौरान न्यायाधीश और दिलीप व नायर के वकीलों की गंभीर चूक को सही ठहराने के लिए दी गयी दलीलों के कारण यह बहुत बड़ा हो गया है।”
अधीनस्थ न्यायालय ने पिछले महीने दिलीप और तीन अन्य लोगों को बरी कर दिया था जबकि मुख्य आरोपी पल्सर सुनी समेत पहले छह आरोपियों को 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी।
एक अधिकारी ने बताया कि अधीनस्थ न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील जल्द ही अदालत में दायर की जाएगी।
भाषा जितेंद्र मनीषा
मनीषा