नयी दिल्ली, सात अप्रैल (भाषा) चेन्नई के कलपक्कम स्थित 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) ने सफलतापूर्वक प्रथम ‘क्रांतिकता’ हासिल कर ली है, जो दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करने और स्वदेशी परमाणु प्रौद्योगिकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
परमाणु रिएक्टर में ‘क्रांतिकता’ नाभिकीय श्रृंखला प्रतिक्रिया की वह स्थिर, स्व-पोषक अवस्था है, जिसमें न्यूट्रॉन उत्पादन न्यूट्रॉन हानि को संतुलित करता है, जिससे नियंत्रित मात्रा में विद्युत उत्पादन संभव हो पाता है।
यह महत्वपूर्ण स्तर परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) की सभी शर्तों को पूरा करने के बाद हासिल किया गया, जिसने संयंत्र प्रणालियों की सुरक्षा की गहन समीक्षा के बाद मंजूरी प्रदान की थी।
पीएफबीआर का प्रौद्योगिकी विकास और डिजाइन स्वदेशी रूप से इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) द्वारा किया गया है, जो परमाणु ऊर्जा विभाग का एक अनुसंधान और विकास केंद्र है।
इसका निर्माण और संचालन भारतीय परमाणु विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) द्वारा किया गया, जो परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम (पीएसयू) है।
एक बयान में कहा गया है कि प्रथम चरण की ‘क्रांतिकता’ हासिल करने के साथ ही भारत अपने तीन-चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की पूरी क्षमता को साकार करने के करीब पहुंच गया है।
भाषा सुभाष माधव
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