चंडीगढ़, पांच मार्च (भाषा) पंजाब विधानसभा के छह मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र में तीखी बहस होने की संभावना है क्योंकि विपक्षी कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (शिअद) कानून व्यवस्था की ‘बिगड़ती’ स्थिति तथा राज्य के बढ़ते कर्ज जैसे प्रमुख मुद्दों पर भगवंत मान सरकार को घेरने की कोशिश करेंगे।
इस बीच, आम आदमी पार्टी (आप) सरकार आठ मार्च को प्रत्येक महिला को 1,000 रुपये देने के अपने चुनावी वादे को पूरा कर सकती है।
इसी दिन वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा राज्य का बजट पेश करेंगे।
संभावित कार्यक्रम के अनुसार, सत्र की शुरुआत छह मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण और श्रद्धांजलि के साथ होगी।
राज्य का बजट आठ मार्च को पेश किया जाएगा।
पूर्व में बजट को कार्यदिवस पर पेश करने की प्रथा थी लेकिन इस बार इसे रविवार को पेश किया जाएगा।
आम आदमी पार्टी सरकार ने पहले ही हर महिला को 1,000 रुपये की मासिक सहायता देने के अपने वादे को पूरा करने का संकेत दे दिया है।
पिछले महीने मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि इस चुनावी वादे को बजट में पूरा किया जाएगा।
यह पंजाब में ‘आप’ सरकार द्वारा पेश किया जाने वाला आखिरी बजट होगा।
राज्य में 2027 की शुरुआत में चुनाव होने हैं।
सत्र के अस्थायी कार्यक्रम के अनुसार, राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा नौ मार्च को होगी और बजट अनुमानों पर चर्चा 10-11 मार्च को होगी।
सदन में 12 मार्च को गैर-सरकारी कार्यवाही होगी जबकि 16 मार्च को विधायी कार्यवाही होगी जिसके बाद सदन को निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाएगा।
विपक्षी दल सत्र के दौरान सत्ता पक्ष को विभिन्न मुद्दों पर चुनौती देने की कोशिश करेंगे जिनमें राज्य में कथित रूप से बिगड़ी कानून-व्यवस्था, अधूरे चुनावी वादे और बढ़ता कर्ज शामिल हैं।
कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह कोटली ने मान सरकार की जमकर आलोचना करते हुए हर मोर्चे पर नाकाम रहने का आरोप लगाया।
कोटली ने कहा कि सरकार ने महिलाओं को 1,000 रुपये देने का वादा पूरा करने का दावा किया है तो उसे पिछले चार वर्षों में प्रत्येक महिला को देय 48,000 रुपये का बकाया भुगतान भी करना चाहिए क्योंकि आम आदमी पार्टी ने 2022 में सत्ता संभालने के बाद वित्तीय सहायता प्रदान करने का वादा किया था।
कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कुछ दिन पहले आरोप लगाया था कि राज्य के पास लंबित ऋणों पर ब्याज चुकाने के लिए भी पर्याप्त धन नहीं है जबकि सरकार 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले समर्थन हासिल करने के उद्देश्य से नई योजनाओं की घोषणा कर रही है जबकि उनके वित्तपोषण के लिए कोई साधन नहीं हैं।
भाषा जितेंद्र नरेश
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