पंजाब मंत्रिमंडल ने निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पांच प्रतिशत तक सीमित करने को मंजूरी दी

Ads

पंजाब मंत्रिमंडल ने निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पांच प्रतिशत तक सीमित करने को मंजूरी दी

  •  
  • Publish Date - June 22, 2026 / 09:20 PM IST,
    Updated On - June 22, 2026 / 09:20 PM IST

चंडीगढ़, 22 जून (भाषा) पंजाब के मंत्रिमंडल ने सोमवार को एक अध्यादेश को मंजूरी दे दी, जिसके तहत निजी स्कूलों द्वारा फीस में की जाने वाली वार्षिक वृद्धि को अधिकतम पांच प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा।

मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने संवाददाताओं को बताया कि निजी स्कूलों को फीस में केवल पांच प्रतिशत की वार्षिक दर से वृद्धि की अनुमति देने का निर्णय लिया गया है।

उन्होंने कहा कि इस संबंध में अध्यादेश राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने अधिक जानकारी देते हुए कहा कि यह भी निर्णय लिया गया है कि यदि किसी स्कूल ने पिछले तीन वर्षों में फीस में 15 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की है, तो 15 प्रतिशत से अधिक वसूली गई राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी।

बैंस ने कहा कि यदि कोई स्कूल फीस में पांच प्रतिशत से अधिक वृद्धि करना चाहता है, तो उसकी मांग की जांच एक समिति करेगी, जिसकी अध्यक्षता संभागीय आयुक्त (डिविजनल कमिश्नर) करेंगे।

उन्होंने बताया कि स्कूल को पांच प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने के कारणों का विस्तृत ब्योरा देना होगा।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि समिति के पास स्कूल की मांग को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार होगा।

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, ‘‘निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा फीस में अनावश्यक और अव्यावहारिक वृद्धि को विनियमित करने के लिए पंजाब मंत्रिमंडल ने ‘पंजाब गैर-सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों की फीस विनियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ लाने को मंजूरी दी है।’’

यह अध्यादेश ‘पंजाब गैर-सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों की फीस विनियमन अधिनियम, 2016’ में संशोधन कर लाया गया है।

बयान में कहा गया कि इस कदम का उद्देश्य फीस वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना, छात्रों और अभिभावकों को मनमानी फीस वृद्धि से संरक्षण प्रदान करना, फीस संरचना में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा उनके हितों की रक्षा करना है।

संशोधनों का उद्देश्य फीस, फीस वृद्धि और संचयी फीस वृद्धि की परिभाषाओं को अधिक स्पष्ट बनाना, गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा वार्षिक फीस वृद्धि की सीमा पांच प्रतिशत निर्धारित करना तथा इससे अधिक वृद्धि के लिए नियामक संस्था की पूर्व अनुमति अनिवार्य करना है।

मुख्यमंत्री मान ने तीन जून को घोषणा की थी कि स्कूल फीस में वृद्धि को अधिकतम पांच प्रतिशत प्रतिवर्ष तक सीमित किया जाएगा।

उन्होंने कहा था कि पांच प्रतिशत की यह सीमा केवल ट्यूशन फीस पर ही नहीं, बल्कि स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले सभी अनिवार्य शुल्कों और निधियों पर भी लागू होगी।

एक अन्य निर्णय में मंत्रिमंडल ने राज्य की औद्योगिक नीतियों के तहत पूंजीगत सब्सिडी और निवेश प्रोत्साहनों के वितरण संबंधी 13 नवंबर 2019 के दिशा-निर्देशों में संशोधन को मंजूरी दी।

बयान के अनुसार, इन संशोधनों का उद्देश्य सब्सिडी वितरण प्रक्रिया को सरल और सुव्यवस्थित बनाना, प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना तथा पात्र औद्योगिक इकाइयों में एकरूपता सुनिश्चित करना है।

राज्य के विभिन्न विभागों के आंकड़ा भंडार (डेटाबेस) को एकीकृत करने, दोहराव से बचने और मौजूदा प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए मंत्रिमंडल ने ‘स्टेट डेटा इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म’ (एसडीआईपी) लागू करने को भी मंजूरी प्रदान की।

एसडीआईपी परियोजना के सुचारू और निर्बाध क्रियान्वयन के लिए पंजाब के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में तीन-स्तरीय संचालन समिति गठित की जाएगी। इस समिति में मुख्य सचिव अध्यक्ष, प्रशासनिक सचिव (सुशासन) सदस्य-संयोजक तथा अन्य विभागों के प्रशासनिक सचिव सदस्य होंगे।

मंत्रिमंडल ने होशियारपुर जिले के दसूया उपमंडल के लिए अतिरिक्त उपायुक्त (सामान्य) और अन्य सहायक कर्मचारियों के पद सृजित करने को भी मंजूरी दी।

बयान में कहा गया कि इससे क्षेत्र के लोगों को जिला स्तर के प्रशासनिक कार्यों, अनुमोदनों, राजस्व मामलों और जन शिकायतों के निवारण के लिए लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता कम होगी।

लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त उपायुक्त (सामान्य) सहित कुल पांच पद तथा आवश्यक सहायक कर्मचारियों के पद सृजित करने की स्वीकृति दी गई है।

भाषा रवि कांत सुरेश

सुरेश