नयी दिल्ली, 11 मार्च (भाषा) सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि पंचायती राज संस्थाओं (पीआरआई) को राशि वितरित करने में केंद्र की कोई भूमिका नहीं है, यह केवल राज्यों द्वारा किया जाता है तथा इस मामले में पंजाब का प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से भी नीचे है।
पंचायती राज राज्य मंत्री एस पी सिंह बघेल ने प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि पीआरआई के लिए निधि की निगरानी करने पर पता लगा कि समीक्षा किए गए 18 राज्यों में पंजाब का प्रदर्शन बेहद खराब है।
उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली से कुछ नहीं होता, राशि का वितरण राज्यों को करना होता है। दिल्ली केवल राशि अंतरित करती है और राज्यों को उसका वितरण करना होता है। केंद्र सरकार केवल निगरानी, प्रशिक्षण और सेमिनार आयोजित करती है।
उन्होंने पंजाब से आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा के एक पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए यह टिप्पणी की।
बघेल ने कहा कि 13वें वित्त आयोग में पंचायती राज संस्थाओं को निधि अंतरण हेतु राज्यों को 65,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि 15वें वित्त आयोग में यह राशि 2.97 लाख करोड़ रुपये थी।
उन्होंने कहा कि 16वें वित्त आयोग में निधि अंतरण के लिए 4.4 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले आयोग की तुलना में लगभग दोगुना है।
बघेल ने कहा, “जहां तक निगरानी की बात है, अगर किसी राज्य की हालत सबसे खराब है तो वह पंजाब है। पंचायत अंतरण सूचकांक (पीडीआई) में कुल 18 राज्यों में पंजाब 18वें स्थान पर है… सभी मापदंडों के अनुसार, पंजाब की स्थिति राष्ट्रीय औसत से भी नीचे है।”
पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि मंत्रालय समय-समय पर अध्ययन, समीक्षा बैठकों, जमीनी दौरों, वीडियो कॉन्फ्रेंस, सूचना प्रौद्योगिकी ऐप आदि के जरिये पंचायतों के प्रदर्शन की समीक्षा करता है।
भाषा अविनाश सुरेश
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