Rahul Gandhi Parliament Speech/Image Credit: IBC24.in
Rahul Gandhi Parliament Speech: नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी महिला आरक्षण बिल पर अपना पक्ष रखा। राहुल गांधी ने संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि, महिलाएं देश की सोच और समाज की दिशा तय करने में एक “ड्राइविंग फोर्स” की भूमिका निभाती हैं और हर व्यक्ति ने अपने जीवन में महिलाओं से बहुत कुछ सीखा है। राहुल गांधी ने महिलाओं के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उनके सशक्तिकरण पर सभी को गंभीरता से विचार करना चाहिए, लेकिन मौजूदा बिल को लेकर उन्होंने कई सवाल भी खड़े किए।
संसद में बोलते हुए, लोकसभा के विपक्ष राहुल गांधी ने कहा, ‘संविधान से ऊपर मनुवाद…अमित शाह कहते हैं कि, जाति जनगणना शुरू हो गई है। (Rahul Gandhi Parliament Speech) उन्होंने चालाकी दिखाने की कोशिश में दो बार दोहराया कि घरों की कोई जाति नहीं होती। मुद्दा यह है कि क्या जाति जनगणना का इस्तेमाल संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व के लिए किया जाएगा या नहीं। अब, आप जो करने की कोशिश कर रहे हैं, वह यह है कि जाति जनगणना का अगले 15 वर्षों के लिए प्रतिनिधित्व से कोई लेना-देना नहीं है।’
Rahul Gandhi Parliament Speech: राहुल गांधी ने महिला आरक्षण बिल पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा कि “पहला सच यह है कि यह महिलाओं का बिल नहीं है और इसका महिलाओं के सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल के जरिए देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश की जा रही है। (Rahul Gandhi Parliament Speech) परिसीमन के मुद्दे को जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि जब तक जाति जनगणना नहीं होती, तब तक इस तरह के बड़े बदलावों को लागू करना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार, बिना स्पष्ट आंकड़ों के आरक्षण और सीटों के पुनर्विन्यास से सामाजिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संबंधों पर भी टिप्णी की और कहा कि “प्रधानमंत्री और मेरे बीच कोई व्यक्तिगत दिक्कत नहीं है।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति नीतियों और निर्णयों को लेकर है।
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