नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) रेल मंत्रालय का ‘नवरत्न’ सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) उत्तराखंड में आगामी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लिंक परियोजना के सभी स्टेशनों और संबंधित बुनियादी ढांचे को ‘ग्रीन बिल्डिंग’ अवधारणा के आधार पर विकसित करेगा।
आरवीएनएल ने बुधवार को जारी एक प्रेस नोट में कहा, ‘‘यह पहल पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रेलवे बुनियादी ढांचे में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार प्रथाओं को शामिल करने की दिशा में एक मील का पत्थर है।’’
हिमालयी क्षेत्र की सबसे महत्वाकांक्षी रेल कनेक्टिविटी पहलों में से एक, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लिंक परियोजना आरवीएनएल द्वारा विकसित की जा रही है ताकि देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गौचर और कर्णप्रयाग समेत प्रमुख शहरों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाया जा सके।
इस परियोजना में 12 स्टेशन – योग नगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, ब्यासी, देवप्रयाग, जनासू, मलेथा, श्रीनगर, धार देवी जी, तिलानी, घोलतीर, गौचर और कर्णप्रयाग होंगे तथा यह रेलमार्ग उत्तराखंड के पांच जिलों को सेवा प्रदान करेगा।
यह प्रस्तावित रेलमार्ग 125 किलोमीटर का होगा । यह परियोजना एक ऐसे कॉरिडोर के तौर पर डिज़ाइन की गयी है जो हर मौसम में काम करेगी और भूस्खलन का सामना करने में सक्षम होगी।
इसका लगभग 104 किलोमीटर (83 प्रतिशत) हिस्सा सुरंगों से होकर गुजरेगा। इसमें 16 मुख्य सुरंगें और 12 ‘एस्केप’ सुरंगें शामिल हैं। साथ ही 19 बड़े पुल और 38 छोटे पुल भी हैं जो इसके इंजीनियरिंग के विशाल पैमाने और जटिलता को दर्शाते हैं।
आरवीएनएल ने कहा,‘‘अपने टिकाऊ-केंद्रित दृष्टिकोण के तहत, आरवीएनएल प्रस्तावित सभी 12 स्टेशन भवनों का निर्माण इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के दिशानिर्देशों के अनुसार करेगा। स्टेशन के डिज़ाइनों में कई तरह की ग्रीन बिल्डिंग विशेषताएं शामिल होंगी, जिनका उद्देश्य ऊर्जा दक्षता बढ़ाना, पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना और यात्रियों के आराम को बेहतर बनाना है।’’
आरवीएनएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सलीम अहमद ने कहा, ‘‘ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लिंक प्रोजेक्ट के लिए ग्रीन बिल्डिंग अवधारणा को अपनाना आरवीएनलए की उस प्रतिबद्धता को दिखाता है जिसके तहत वह ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार करता है जो न केवल तकनीकी रूप से मज़बूत हो बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हो।’’
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राजकुमार नरेश
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