जयपुर, 11 जुलाई (भाषा) एक युवती द्वारा जमीन जायदाद और सरकारी नौकरी के लिए अपनी मां की हत्या की साजिश रचने के मामले में नए आरोप सामने आए हैं। आरोपी युवती के मामा ने उसके (युवती के) पिता की मौत की भी जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने संदेह जताया है कि उनकी मौत में भी युवती का हाथ हो सकता है।
पुलिस ने कहा कि उन्हें इस संबंध में एक शिकायत मिली है और सक्षम अधिकारी इसकी जांच करेंगे।
पुलिस ने इस मामले में युवती आयुषी शर्मा (23) और उसके ताऊ मोहन स्वरूप (56) समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है। मोहन का बेटा बलराम शर्मा फरार है।
प्रताप नगर के रवींद्र नगर में रहने वाली आयुषी की मां नीरज शर्मा (45) को तीन जुलाई को तेज गति से गुजर रहे वाहन (स्कॉर्पियो) ने टक्कर मार दी जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
नीरज के भाई राकेश ने हत्या का संदेह जताते हुए अपनी भांजी व अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया।
पुलिस टीम की जांच में सामने आया कि नीरज की मौत किसी दुर्घटना में नहीं हुई बल्कि यह एक सोची समझी साजिश थी। ‘सुपारी’ देकर महिला की हत्या करवाई गई और इसे सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की गई। पुलिस ने हत्या के आरोप में महिला की बेटी आयुषी और उसके जेठ व अन्य को गिरफ्तार किया।
आयुषी के मामा राकेश शर्मा ने पुलिस से मामले की गहराई से जांच करने की मांग की है।
उनका आरोप है कि मुख्य आरोपी बलराम शर्मा अभी फरार है और ‘सुपारी’ के लिए दिए गए पैसे समेत अहम सबूत अभी तक बरामद नहीं हुए हैं।
उन्होंने इस मामले में 14-15 करोड़ रुपये की संपत्ति के लालच में रची गई साज़िश का भी शक जताया है।
राकेश शर्मा ने अपने बहनोई की मौत से जुड़ी परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद आयुषी और बलराम ने उन्हें लगभग तीन महीने तक किसी अज्ञात जगह पर रखा था।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘पिछले साल दिसंबर से अप्रैल तक उनके बहनोई को छिपाकर रखा गया। जब मैंने चिकित्सकों से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि उनकी हालत गंभीर थी – फेफड़ों में पानी भर गया था, लीवर बुरी तरह खराब हो गया था। अगर पुलिस ठीक से जांच करे, तो पता चलेगा कि उनकी मौत में भी आयुषी और बलराम का हाथ था।’
उनके वकील चंद्र प्रकाश शर्मा ने भी ऐसी ही चिंताएं जाहिर कीं। उनका आरोप है कि आयुषी ने संपत्ति पर कब्ज़ा करने और अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी पाने के लिए अपनी मां की हत्या की थी।
वकील ने दावा किया ‘इस मामले से जुड़ी जमीन जायदाद (प्रॉपर्टी) की कीमत लगभग 14 करोड़ रुपये है। इसमें कृषि भूमि व भूखंड शामिल हैं। वह संपत्ति अपने नाम करवान चाहती थी और अपने पिता की जगह अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी पाना चाहती थी।’’ वह नहीं चाहती थी कि उसकी मां नौकरी करती रहे।
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि आयुषी के पिता, जिनका पहले ब्रेन ट्यूमर का इलाज चल रहा था, अस्पताल में काफी ठीक हो गए थे लेकिन उन्हें अस्पताल से जबरदस्ती छुट्टी दिलवाकर किराए के अनजान मकान में रखा गया।
उन्होंने आयुषी पर आरोप लगाते हुए कहा,”जब उन्हें बाद में दोबारा भर्ती कराया गया, तो डॉक्टरों ने कहा कि उनकी हालत बहुत खराब हो चुकी थी। दो दिन के अंदर ही संदिग्ध हालात में उनकी मौत हो गई। उन्हें उचित इलाज और बताई गई दवाइयां नहीं उपलब्ध कराई गईं।
पुलिस उपायुक्त रंजीता शर्मा ने कहा कि पुलिस ने शिकायत पर गौर किया है और समुचित जांच का विश्वास दिलाया है।
उन्होंने कहा,‘‘शिकायतकर्ता ने लिखित शिकायत दी है। उठाए गए सभी बिंदुओं की विस्तार से जांच की जाएगी। मुख्य आरोपी की तलाश जारी है और उसे जल्द ही गिरफ़्तार कर लिया जाएगा।’’
आरोपी आयुषी के पिता की मौत के मामले में जांच की मांग पर उन्होंने कहा, ‘परिवार ने इस मामले में भी जांच की मांग की है। सक्षम अधिकारी इस मामले की जांच करेंगे।’
पुलिस अधिकारियों ने संकेत दिया कि इस मामले में संपत्ति का विवाद और परिवार के भीतर तनाव के साथ-साथ अनुकंपा के आधार पर सरकारी नौकरी से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि हो सकता है कि इन सबके चलते ही महिला की हत्या की कथित तौर पर साजिश रची गई हो।
पुलिस ने बताया कि नीरज को लगभग एक साल पहले अपने पति विजय कुमार शर्मा की मौत के बाद अनुकंपा के आधार पर अदालत में क्लर्क (एलडीसी) की नौकरी मिली थी। आरोपी बेटी कथित तौर पर यह नौकरी खुद पाना चाहती थी।
भाषा पृथ्वी संतोष
संतोष