राजस्थान: कांग्रेस ने भाजपा पर नगर निकाय चुनावों में सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाया

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राजस्थान: कांग्रेस ने भाजपा पर नगर निकाय चुनावों में सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाया

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  • Publish Date - September 1, 2026 / 01:44 PM IST,
    Updated On - September 1, 2026 / 01:44 PM IST

जयपुर, एक सितंबर (भाषा) कांग्रेस ने राजस्थान में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर नगर निकाय चुनावों की नामांकन प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को दावा किया कि अंतिम समय सीमा से पहले उसके उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया।

निकाय चुनावों के लिए नामांकन दाखिल करने की समयसीमा सोमवार अपराह्न तीन बजे समाप्त हो गई।

राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर भाजपा उम्मीदवारों को समयसीमा समाप्त होने के बाद भी पार्टी के चुनाव चिह्न से संबंधित अधिकृत पत्र जमा करने की अनुमति दी गई।

जूली ने कहा, “समय रहते पार्टी का चुनाव चिह्न लेकर पहुंचे कांग्रेस उम्मीदवारों के नामांकन पत्र स्वीकार नहीं करना लोकतंत्र की हत्या है।”

उन्होंने भीलवाड़ा, अलवर, बसेड़ी और मथानिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग से मामले का तत्काल संज्ञान लेने की मांग की।

जूली ने आरोप लगाया कि भीलवाड़ा में कांग्रेस प्रत्याशियों को समय से पहले उपस्थित होने के बावजूद नामांकन और चुनाव चिह्न संबंधित अधिकृत पत्र जमा नहीं करने दिया गया।

उन्होंने अलवर में भी नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए दावा किया कि बसेड़ी में भाजपा उम्मीदवारों के नामांकन पत्र समयसीमा समाप्त होने के बाद भी स्वीकार किए गए।

उन्होंने कहा, “ये घटनाएं चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। सत्ता के दबाव में चुनाव नियमों में इस तरह का दोहरा मापदंड लोकतंत्र पर हमला है।”

जूली के आरोपों के बीच कांग्रेस की पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा ने जोधपुर जिले के मथानिया में निर्वाचन अधिकारी (आरओ) के कार्यालय के बाहर धरना दिया। उन्होंने नामांकन प्रक्रिया में कथित भेदभाव का आरोप लगाया।

मदेरणा ने सोमवार से विरोध शुरू किया और रातभर अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठी रहीं।

मदेरणा ने आरोप लगाया कि सोमवार को अपराह्न तीन बजे की समयसीमा समाप्त होने के बाद स्थानीय विधायक और भाजपा के एक उम्मीदवार को निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में प्रवेश की अनुमति दी गई।

उनके अनुसार, स्थानीय पुलिस थाने के अधिकारी विधायक को निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अंदर ले गए, जबकि वहां पहले से मौजूद कांग्रेस के एक उम्मीदवार को बाहर कर दिया गया।

मदेरणा ने सवाल किया, “एक ही नियम दो लोगों के लिए अलग-अलग कैसे हो सकता है?”

उन्होंने कहा, “अगर अपराह्न तीन बजे के बाद नामांकन प्रक्रिया के लिए किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं थी, तो स्थानीय विधायक और उनके लोगों को अंदर कैसे जाने दिया गया? अगर गेट बंद था तो पुलिस अधिकारी उन्हें अंदर कैसे ले गए?”

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि कांग्रेस उम्मीदवार को कार्यालय से बाहर निकालने का आदेश किसने दिया।

मदेरणा ने कहा कि मामला केवल एक कांग्रेस उम्मीदवार के साथ किए गए व्यवहार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

कांग्रेस के महासचिव एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने भी बाड़मेर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इसी तरह के आरोप लगाए।

पायलट ने आरोप लगाया कि जोधपुर और अलवर समेत कई स्थानों पर भाजपा उम्मीदवारों ने समयसीमा समाप्त होने के बाद अपने पार्टी के चुनाव चिह्न से संबंधित अधिकृत पत्र जमा किए।

उन्होंने कहा, “समयसीमा के बाद भाजपा उम्मीदवारों के चुनाव चिह्न स्वीकार करना कैसे उचित है? यह सब रिकॉर्ड में दर्ज है। इसके बावजूद राज्य निर्वाचन आयोग कुछ नहीं कर रहा है।”

पायलट ने राज्य निर्वाचन आयोग पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस में गुटबाजी से जुड़े सवाल पर पायलट ने कहा कि अंदरूनी मतभेद भाजपा में हैं।

उन्होंने कहा, “गुटबाजी भाजपा में है। एक ही वार्ड में दो उम्मीदवार पार्टी का चुनाव चिह्न लेकर पहुंच रहे हैं।”

पायलट ने दावा किया कि लोगों ने पिछले ढाई वर्षों में भाजपा सरकार के कामकाज का आकलन कर लिया है और उम्मीद जताई कि कांग्रेस नगर निकायों में बोर्ड बनाने में सफल होगी।

राजस्थान में 309 शहरी स्थानीय निकायों के 10,245 वार्ड के लिए चुनाव हो रहे हैं। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगर पालिकाएं शामिल हैं।

चुनाव के लिए मतदान नौ और 11 सितंबर को दो चरणों में होगा, जबकि मतगणना 14 सितंबर को की जाएगी। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि तीन सितंबर है।

नगर निकायों के अध्यक्षों का चुनाव 21 सितंबर को होगा। नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं की सामान्य बैठकें 22 सितंबर को होंगी। इन्हीं बैठकों में उप महापौर, उपसभापति और नगरपालिका उपाध्यक्षों का चुनाव होगा।

इन चुनावों में करीब 1.44 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए पात्र हैं। राज्यभर में 16,465 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।

भाषा बाकोलिया

मनीषा खारी

खारी