राजस्थान उच्च न्यायालय से आसाराम को मिली 20 दिन की पैरोल

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राजस्थान उच्च न्यायालय से आसाराम को मिली 20 दिन की पैरोल

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  • Publish Date - August 4, 2026 / 09:18 PM IST,
    Updated On - August 4, 2026 / 09:18 PM IST

जोधपुर, चार अगस्त (भाषा) राजस्थान उच्च न्यायालय ने 2013 में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म करने के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू बाबा आसाराम को 20 दिन की नियमित पैरोल प्रदान की है।

अदालत ने कहा कि राजस्थान सरकार उसकी पैरोल याचिका खारिज करने के अपने निर्णय को उचित ठहराने में विफल रही।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने जोधपुर केंद्रीय कारागार में बंद 85 वर्षीय आसाराम को राहत देते हुए उसकी जेल में बिताई अवधि और पहले मिली अंतरिम रिहाइयों के दौरान उसके आचरण को ध्यान में रखा।

उच्च न्यायालय ने कहा कि आसाराम अब तक 13 वर्ष, एक माह और 24 दिन जेल में बिता चुका है, उसे पहले भी कई बार अंतरिम जमानत मिली थी और उस दौरान उसके द्वारा जमानत की शर्तों का उल्लंघन करने, न्यायिक प्रक्रिया से बचने, गवाहों को प्रभावित करने या कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न करने का कोई रिकॉर्ड नहीं है।

उच्च न्यायालय ने तीन अगस्त के अपने आदेश में आसाराम को पहली नियमित पैरोल मंजूर करते हुए 50 हजार रुपये के निजी मुचलके और 25-25 हजार रुपये की दो जमानतें पेश करने की शर्त पर 20 दिन के लिए रिहा करने का निर्देश दिया।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि जोधपुर जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति पहले ही आसाराम की पैरोल याचिका खारिज कर चुकी है।

सरकार की ओर से पुलिस ने पैरोल का कड़ा विरोध करते हुए आशंका जताई कि रिहा होने पर आसाराम फरार हो सकता है।

राज्य सरकार ने राजस्थान कैदी पैरोल नियम, 1958 के नियम 14(ए) का हवाला देते हुए कहा कि उसके खिलाफ राजस्थान के बाहर भी आपराधिक मामले लंबित हैं और गुजरात के गांधीनगर की अदालत उसे एक अन्य मामले में दोषी ठहरा चुकी है।

सरकार ने यह भी कहा कि आसाराम का उपचार चल रहा है और सक्षम चिकित्सा अधिकारी ने उसे पैरोल के लिए चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित नहीं किया है। उसने कहा कि उसकी रिहाई से पीड़िता के परिवार की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और पुलिस की आशंकाओं को केवल अनुमान आधारित एवं ठोस साक्ष्यों से रहित बताया।

उच्च न्यायालय ने कहा कि राजस्थान की अदालत द्वारा सुनाई गई सजा के संबंध में आसाराम की पैरोल का अधिकार केवल राजस्थान कैदी पैरोल नियम, 1958 के तहत तय होगा। खंडपीठ ने कहा कि अन्य राज्यों में लंबित मामले या वहां सुनायी गयी सजाएं अपने-अपने कानूनों के अनुसार चलेंगी और केवल इसी आधार पर वर्तमान मामले में पैरोल से इनकार नहीं किया जा सकता।

इसी वर्ष 27 मई को राजस्थान उच्च न्यायालय ने इस मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था।

सोमवार को राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय में आसाराम की ‘ओपन एयर कैंप’ में स्थानांतरण की अलग याचिका का भी विरोध किया।

सरकार ने ‘राजस्थान कैदी ओपन एयर कैंप’ नियम, 1972 के नियम-3 का हवाला देते हुए कहा कि सामान्यतः राजस्थान के बाहर के निवासी, भारतीय दंड संहिता की धारा 376 और 377 जैसे गंभीर यौन अपराधों में दोषी तथा 60 वर्ष से अधिक आयु के कैदियों को ‘ओपन एयर कैंप’ में स्थानांतरित नहीं किया जाता।

हालांकि उच्च न्यायालय ने कहा कि नियम 3(डी) की वैधता का मुद्दा पहले से ही बड़ी पीठ के समक्ष लंबित है। अदालत ने इस मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी किए बिना अतिरिक्त महाधिवक्ता (एएजी) को यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि नियमों में 60 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा निर्धारित करने का आधार क्या है।

मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

भाषा बाकोलिया राजकुमार

राजकुमार