राजस्थान : कविताओं और गीतों में पिरोकर भौतिकी को सरल बना रहे सेवानिवृत्त प्रोफेसर

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राजस्थान : कविताओं और गीतों में पिरोकर भौतिकी को सरल बना रहे सेवानिवृत्त प्रोफेसर

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  • Publish Date - August 26, 2026 / 01:13 PM IST,
    Updated On - August 26, 2026 / 01:13 PM IST

जयपुर, 26 अगस्त (भाषा) जटिल अवधारणाओं और सूत्रों के कारण विद्यार्थियों के बीच अक्सर कठिन माने जाने वाले भौतिक विज्ञान को राजस्थान विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त प्रोफेसर ऋषि कुमार सिंघल ने कविता और गीतों के जरिए आसान बनाने की पहल की है। उन्होंने रॉकेट की गति, ब्लैक होल, रमन प्रभाव और क्वांटम मैकेनिक्स जैसे विषयों को हिंदी की कविताओं और गीतों में ढाला है।

उन्होंने ‘फिजिक्स थ्रू पोएट्री’ नाम से पहल शुरू की है। इसके जरिए भौतिक विज्ञान को कविताओं और गीतों में पिरोकर इतना सरल और रोचक बना दिया है कि विद्यार्थी इसे गुनगुनाते हुए समझ सकते हैं।

उन्होंने अब तक चार महत्वपूर्ण पुस्तकें ‘काव्य भौतिकी’, ‘सुर भौतिकी’, ‘गीत भौतिकी’ और ‘राग भौतिकी’ लिखी हैं। इन पुस्तकों में लगभग ढाई सौ कविताएं हैं, जो उन विषयों पर आधारित हैं जिन्हें विद्यार्थी सामान्यतः अत्यंत कठिन मानते हैं। ये कविताएं हिंदी में लिखी गई हैं और वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझाते समय इन्हें गीत के रूप में भी गाया जा सकता है।

प्रोफेसर सिंघल ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि इन पुस्तकों में कक्षा 12 से स्नातकोत्तर (एमएससी) तक 250 टॉपिक को शामिल किया गया है।

सिंघल ने कहा, ‘‘रॉकेट की गति, ब्लैक होल और रमन प्रभाव जैसे विषय मुश्किल लग सकते हैं, लेकिन कविता के माध्यम से इन अवधारणाओं को काफी सरल तरीके से समझाया जा सकता है।’’

उदाहरण के तौर पर रॉकेट की गति के सिद्धांत को समझाने वाली उनकी एक कविता में लिखा है—

‘‘किस तरह धरा को छोड़ एक, रॉकेट गगन को जाता है, न्यूटन का क्रिया-प्रतिक्रिया का, तीसरा नियम समझाता है।’’

यह कविता बताती है कि न्यूटन के गति के तीसरे नियम के आधार पर रॉकेट किस प्रकार ऊपर की ओर गति करता है। इसमें गैसों के तेजी से दहन, संवेग में बदलाव और रॉकेट को आगे बढ़ाने वाले बल का भी वर्णन किया गया है।

न्यूटन का गति का तीसरा नियम कहता है कि प्रत्येक क्रिया के विपरीत हमेशा एक समान प्रतिक्रिया होती है।

इसी तरह सिंघल ने ब्लैक होल को भी कविता के माध्यम से समझाया है। इसमें ब्लैक होल के अत्यधिक घनत्व और शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल का वर्णन किया गया है।

उन्होंने रमन प्रभाव और नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक सी. वी. रमन के कार्य को भी कविता के जरिए समझाया है। उनकी एक रचना में भूमध्य सागर के पानी के नीले रंग को लेकर रमन के अवलोकन और उस खोज तक पहुंचने वाले प्रयोगों का वर्णन किया गया है।

कविता की पंक्तियां हैं—

‘‘भू-मध्य सिंधु के जल में जब, एक दिखा दूधिया नीलापन,

विकिरण के इसी प्रकीर्णन से, एक दिव्य दृष्टि पा गए रमन।’’

अणुओं के निर्माण से जुड़ी भौतिक विज्ञान की अवधारणाओं को भी उन्होंने कविता में ढाला है। इसमें बताया गया है कि किस प्रकार दो परमाणु एक-दूसरे के करीब आते हैं और घूर्णन तथा कंपन संबंधी बदलावों से गुजरने के बाद बंधन ऊर्जा के कारण एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।

सिंघल के अनुसार, ‘फिजिक्स थ्रू पोएट्री’ विज्ञान और साहित्य को जोड़ने का महज प्रयास नहीं है, बल्कि यह पढ़ाने का एक वैकल्पिक तरीका है, जो विद्यार्थियों के लिए भौतिक विज्ञान को अधिक सहज बना सकता है।

उन्होंने बताया कि उनकी कविताओं में यांत्रिकी, प्रकाशिकी, नाभिकीय भौतिकी, क्वांटम मैकेनिक्स, ऊष्मागतिकी तथा परमाणु एवं आणविक स्पेक्ट्रोस्कोपी सहित विभिन्न विषयों को शामिल किया गया है।

प्रोफेसर ऋषि की पुस्तक ‘काव्य भौतिकी’ को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा “सर्जना पुरस्कार” 2020 से सम्मानित किया जा चुका है। इस पुस्तक का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन, दिल्ली द्वारा किया गया, जबकि विज्ञान संप्रेषण की दिशा में कार्यरत विज्ञान प्रसार, दिल्ली ने भी इनकी एक कृति ‘सुर भौतिकी’ प्रकाशित की। पुस्तक का लोकार्पण तत्कालीन उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में किया था।

इसके अतिरिक्त साहित्य मंडल श्रीनाथद्वारा ने भी प्रोफेसर सिंघल को “साहित्य भौतिकी रत्न पुरस्कार” से सम्मानित किया है।

भाषा बाकोलिया मनीषा वैभव

वैभव

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