Rajiv Shukla Speech: ‘बीमा कंपनियां किसानों को नहीं दे रहीं पूरा मुआवजा’, सदन में कांग्रेस सासंद का बड़ा आरोप, कहा- ‘किसानों को मिल रहे 3-5 रुपये’

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Rajiv Shukla Speech: 'बीमा कंपनियां किसानों को नहीं दे रहीं पूरा मुआवजा', सदन में कांग्रेस सासंद का बड़ा आरोप, कहा- 'किसानों को मिल रहे 3-5 रुपये'

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  • Publish Date - March 13, 2026 / 02:02 PM IST,
    Updated On - March 13, 2026 / 02:03 PM IST

Rajiv Shukla Speech | Photo Credit: IBC24 Customize

HIGHLIGHTS
  • राजीव शुक्ला ने फसल बीमा योजना की खामियों पर सवाल उठाए
  • किसानों को मुआवजे के नाम पर बेहद कम रकम मिलने की बात कही
  • बीमा कंपनियों के लाभ और किसानों की समस्याओं पर सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग

नई दिल्ली: Rajiv Shukla Speech कांग्रेस के राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने शुक्रवार को राज्यसभा में किसानों से जुड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ‘मैं सदन में देश के महत्वपूर्ण विषय पर ध्याकार्षित करना चाहता हूं। कृषि बीमा योजना या फसल बीमा योजना से का नाम आप सब लोगों ने सुना होगा। लेकिन आजकल बीमा योजना के जो हाल हुए हैं। उसमें सरकार को जरूर ध्यान देना चाहिए। किसानों को कुछ नहीं मिल रहा है। ये योजना बड़े ही उद्देश्य के साथ शुरू की गई थी। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियां किसानों को सही तरीके से व पूरा मुआवजा नहीं दे रही हैं। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, जो देश के करोड़ों किसानों से जुड़ा है।

Rajiv Shukla Speech in Rajya Sabha उन्होंने कहा कि ‘कई राज्यों से जो उदाहरण सामने आए हैं, वे इस योजना की गंभीर खामियों को उजागर करते हैं। महाराष्ट्र में किसानों की फसल खराब हुई और जब मुआवजा आया तो किसी के खाते में 21 रुपये, किसी के खाते में 8 रुपये और कुछ किसानों के खाते में तो केवल 3 रुपये ही आए।’

उन्होंने राज्यसभा में कहा कि ‘वह यह पूछना चाहते हैं कि 3 रुपये से किसान क्या करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का नाम तो हम सबने सुना है। इसे बड़े उद्देश्य के साथ शुरू किया गया था। कहा गया था कि किसान कम प्रीमियम देकर सूखा, बाढ़, ओला-बारिश, कीट-रोग जैसी प्राकृतिक आपदाओं से अपनी फसल को सुरक्षित कर सकेंगे। संकट की घड़ी में उन्हें आर्थिक सहारा मिलेगा और उनकी आय स्थिर रहेगी।’

सांसद ने कहा कि ‘इसी तरह उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में आई बाढ़ में धान की फसल डूब गई। किसानों ने बीमा का दावा किया, मुआवजे के नाम पर किसी के खाते में 3 रुपए 76 पैसे और किसी के खाते में 2 रुपए 72 पैसे आए।’

उन्होंने कहा कि ‘वह सरकार से पूछना चाहते हैं कि क्या किसान 5 रुपए में नई फसल बो पाएगा। क्या 3 रुपए में डीजल आएगा। क्या पौने 3 रुपए में कीटनाशक मिलेगा। या फिर किसान उन पैसों को फ्रेम करवाकर रख ले कि यह उसका बीमा सुरक्षा कवच है।’

राजीव शुक्ला ने कहा कि ‘बीमा का अर्थ होता है संकट के समय सहारा। लेकिन यहां स्थिति ऐसी है कि किसान सोचता होगा कि इतने पैसों में तो मोबाइल रिचार्ज भी नहीं होता, फसल कैसे होगी। समस्या केवल रकम की नहीं है। कई जगह फसल का फिजिकल वेरिफिकेशन भी समय पर नहीं होता। अधिकारी खेतों में तब पहुंचते हैं जब फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी होती है और दोबारा बुआई का समय आ जाता है। कई बार पोर्टल बंद हो जाता है, सर्वर डाउन हो जाता है और किसान चक्कर लगाते-लगाते चप्पल घिस देता है, लेकिन उतना मुआवजा भी उसे नहीं मिलता। ऊपर से एरिया एप्रोच के नाम पर औसत निकाल दिया जाता है। अगर पूरे क्षेत्र का औसत ठीक बता दिया गया, जिस किसान की फसल पूरी तरह चौपट हो गई, उसे भी कह दिया जाता है कि आपके इलाके में तो सब सामान्य है।’

‘किसान डेढ़ से दो प्रतिशत प्रीमियम देता है और बाकी पैसा सरकार देती है, यानी जनता का पैसा। इस तरह बीमा कंपनियों को हजारों करोड़ रुपए का प्रीमियम मिलता है। जो साल सामान्य होता है तब दावे भी कम आते हैं और कंपनियों का लाभ बढ़ता रहता है। लेकिन जब किसान की बारी आती है, तो उसके हिस्से में 3 रुपये, 5 रुपये जैसे मुआवजे आते हैं। कभी-कभी तो किसानों के खातों से बिना स्पष्ट जानकारी के प्रीमियम भी कट जाता है। यानी जोखिम किसान और सरकार उठाएं लेकिन लाभ कोई और ले जाए, यह व्यवस्था न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बीमा दावों के निपटान और भुगतान की स्पष्ट समयसीमा तय की जाए। फसल नुकसान का समय पर और पारदर्शी सर्वेक्षण सुनिश्चित किया जाए।’

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्या है?

यह योजना किसानों को कम प्रीमियम पर प्राकृतिक आपदाओं जैसे सूखा, बाढ़, ओला, कीट-रोग से फसल सुरक्षा देने के लिए शुरू की गई थी।

किसानों को कितना मुआवजा मिला?

कई राज्यों में किसानों को मुआवजे के नाम पर 3 रुपये, 5 रुपये, 8 रुपये जैसी बेहद कम रकम मिली।

बीमा कंपनियों को कितना लाभ होता है?

किसानों और सरकार से प्रीमियम लेकर कंपनियों को हजारों करोड़ रुपये का लाभ होता है, लेकिन दावे कम आने पर उनका फायदा और बढ़ जाता है।